Science Meets Culture In JIIT Noida: शिक्षा और संस्कार जब एक मंच पर मिलते हैं, तो तस्वीर कितनी खूबसूरत होती है. इसका जीता-जागता उदाहरण नोएडा के जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (JIIT) में देखने को मिला. संस्थान में आयोजित 9वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन बायोसाइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी केवल अकादमिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि शाम होते-होते यह ‘विविधता में एकता’ के एक भव्य उत्सव में बदल गई.
दिन के सत्र में माहौल पूरी तरह बौद्धिक रहा. दुनिया भर से आए वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों (Spokespersons) ने बायोसाइंस और बायोटेक्नोलॉजी में हो रहे नए शोधों पर चर्चा की. छात्रों ने सीखा कि ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में विज्ञान कैसे भूमिका निभा सकता है. कॉन्फ्रेंस में ग्लोबल विचारों का आदान-प्रदान हुआ, जिससे नई पीढ़ी को भविष्य की अपार संभावनाओं के बारे में जानने का मौका मिला.
जैसे ही सूरज ढला, जेपी इंस्टीट्यूट का प्रांगण भारतीय संस्कृति के रंगों में सराबोर हो गया. दिन में विज्ञान की जटिल गुत्थियां सुलझाने वाले छात्र शाम को पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए. मकसद साफ था. कॉन्फ्रेंस में आए विदेशी डेलीगेट्स (Foreign Delegates) को यह दिखाना कि भारत आधुनिकता की दौड़ में आगे बढ़ते हुए भी अपनी जड़ों से मजबूती से जुड़ा है.
गणपति बप्पा के आगमन से विसर्जन तक का भावुक मंचन सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण छात्रों द्वारा गणेश चतुर्थी पर दी गई प्रस्तुति रही. छात्रों ने नृत्य नाटिका के जरिए गणपति के आगमन का उल्लास और विसर्जन के समय की भावुकता को बखूबी प्रदर्शित किया. खास बात यह रही कि हिप-हॉप (Hip-Hop) में एक्सपर्ट क्लब के छात्रों ने भी इस इवेंट के लिए भारतीय संस्कृति को चुना और अपनी कला के जरिए देश का प्रतिनिधित्व किया. एक छात्रा ने बताया कि
‘हमने वंदना से ज्यादा उस पूरे प्रोसेस को दिखाया कि कैसे बप्पा के आने पर हम खुश होते हैं और विसर्जन के वक्त उदास. हम दिखाना चाहते थे कि भारत में आध्यात्मिकता और भावनाएं कैसे जुड़ी हैं.’
कार्यक्रम में पंजाबी लोकनृत्य भांगड़ा और बॉलीवुड गीतों का तड़का भी लगा. ‘सजदा तेरा सजदा’ गाने पर छात्रों की प्रस्तुति ने समां बांध दिया. वहीं, पंजाबी बोलियों “सारी दुनिया पानी भरदी है, पंजाब दियां सोहणियां नारियां दा” पर छात्र झूमते नजर आए. छात्रों ने बताया कि इन प्रस्तुतियों के लिए उन्होंने एक महीने तक कड़ी मेहनत की है. कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग से लेकर कोरियोग्राफी तक, सब कुछ छात्रों का ‘टीम एफर्ट’ था. इस दौरान उन्होंने संदेश दिया कि
‘हम एक घर से तीन कल्चर दिखा सकते हैं एक छात्रा ने कहा हमारे लिए यह गर्व की बात है कि हम विदेशी मेहमानों को दिखा सकें कि हम कितने डायवर्सिफाइड हैं. कभी-कभी तो हम एक ही घर से तीन अलग-अलग कल्चर को प्रोजेक्ट कर सकते हैं.’
इस आयोजन ने पुरानी कहावत “खेलोगे कूदोगे होगे खराब” को पूरी तरह खारिज कर दिया. भारत एक्सप्रेस की रिपोर्टर कोमल शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन छात्रों ने साबित कर दिया है कि पढ़ाई-लिखाई के साथ अपनी परंपराओं को लेकर चलना और एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज में हिस्सा लेना, व्यक्तित्व विकास के लिए बेहद जरूरी है.
देश के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक का दौर जारी है, जबकि ओडिशा और…
अगर आप अपने फास्टैग का बैंक बदलना चाहते हैं तो अब नया टैग लगवाने की…
एशियन गेम्स 2026 में भारत का पहला मेडल सुचिका तरियाल ने पक्का किया. 36 साल…
Rajasthan Ajmer suicide case: अजमेर के गढ़ी मलियान इलाके में एक ही परिवार के तीन…
Patna cyber fraud: पटना में बैठकर अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों से कथित साइबर ठगी…
Giridih By-election 2026: झारखंड की गिरिडीह विधानसभा सीट पर सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के…