मुलावूर, केरलम – देश भर में अल्पसंख्यक शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई) के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रोफ़ेसर (डॉ.) शाहिद अख्त़र के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने केरलम के मुलावूर स्थित इलाहिया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने इलाहिया ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें डिजिटल अपनाने, नवीन शिक्षण विधियों और शैक्षणिक अवसरों के विस्तार के माध्यम से अल्पसंख्यक संस्थानों के आधुनिकीकरण पर विशेष ज़ोर दिया गया।
शिक्षा परिवर्तन की नई दृष्टि
इलाहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष जनाब के. एम. परीथ की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में देश के विशिष्ट शिक्षाविदों, प्रशासकों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने अल्पसंख्यक शिक्षा के भविष्य पर गहन विचार-विमर्श किया। अधिवक्ता टी. एस. रशीद ने स्वागत भाषण देकर इस ऐतिहासिक बैठक का शुभारंभ किया, जो संस्थागत उत्कृष्टता और तकनीकी एकीकरण पर एक मील का पत्थर साबित हुआ।
अपने मुख्य संबोधन में प्रो. (डॉ.) शाहिद अख्त़र ने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों में नवीन शिक्षण पद्धतियों और डिजिटल परिवर्तन को अपनाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रोफ़ेसर रहे और झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष का अनुभव रखने वाले प्रो. अख्त़र ने स्पष्ट किया कि आज के दौर में तकनीकी को अपनाना कोई विकल्प नहीं, बल्कि शैक्षिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए यह अनिवार्य हो गया है। उनके विचार आयोग के उस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जो पूरे देश में अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और पारदर्शिता बढ़ाने हेतु डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों का लाभ उठाने पर केंद्रित है।
प्रो. अख्त़र ने अपने पिछले वक्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि “भारत की आत्मा आपसी भाईचारे, सहिष्णुता और बहुलवाद में बसती है।” यह उनका वह दर्शन है जो अल्पसंख्यक शैक्षणिक अधिकारों को भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के केंद्र में रखता है। उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 में दी गई संवैधानिक गारंटियों की रक्षा के लिए निरंतर सुधारों की मुहिम में उनका नेतृत्व हमेशा सराहनीय रहा है।
डीम्ड विश्वविद्यालय की संभावना क्षितिज पर
इस विचार-विमर्श का एक अहम पड़ाव तब आया जब जामिया हमदर्द के रजिस्ट्रार कर्नल ताहिर मुस्तफ़ा ने उच्च शिक्षा में उपलब्ध अत्याधुनिक अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से इलाहिया ट्रस्ट के शिक्षण संस्थानों के समूह द्वारा ‘डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी’ (मानित विश्वविद्यालय) के दर्जे के लिए आवेदन करने की संभावनाओं को रेखांकित किया।
ग़ौरतलब है कि कर्नल ताहिर मुस्तफ़ा भारतीय सेना के एक सेवारत अधिकारी हैं, जिनका सामरिक योजना, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी और स्वचालित सर्वेक्षण प्रणालियों में शानदार करियर रहा है। जुलाई 2025 में उन्हें जामिया हमदर्द का रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया था, जिसे इस प्रतिष्ठित संस्थान में सैन्य अनुशासन और शैक्षणिक सुधारों को सम्मिलित करने के एक साहसिक क़दम के रूप में देखा गया। मुलावूर में आयोजित इस सभा को संबोधित करते हुए कर्नल मुस्तफ़ा ने अपने प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाते हुए संस्थागत उन्नयन के लिए एक स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया, जो इलाहिया के शैक्षणिक नेटवर्क को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और स्वायत्तता दिलाने का संकेत देता है।
इस अवसर पर आईएमटी हैदराबाद के निदेशक प्रोफ़ेसर बाहुल इस्लाम ने समकालीन मांगों को पूरा करने के लिए शिक्षण रणनीतियों को विकसित करने और शैक्षिक प्रौद्योगिकियों को अद्यतन करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उनके विचारों ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि बढ़ती डिजिटल प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अल्पसंख्यक संस्थानों को खुद को प्रासंगिक और सक्षम बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
उत्कृष्टता के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता
इस महत्वपूर्ण सत्र में ट्रस्ट के विभिन्न पदाधिकारियों और शैक्षणिक हस्तियों ने भाग लिया। इस अवसर पर एमआरएम केरलम के सह-संयोजक समद मुदावना, ट्रस्ट कोषाध्यक्ष एम. एम. मुहम्मद कुंज, ट्रस्ट सचिव एम. के. सय्यद मुहम्मद, इंजीनियरिंग कॉलेज प्रबंधक वी. यू. सिद्धिक, (लॉ कॉलेज) अध्यक्ष के. वाई. सादिक़ मुहम्मद, और इलाहिया पब्लिक स्कूल प्रबंधक वी. के. अब्दुल सलाम के अलावा शिक्षकगण और वरिष्ठ विश्वविद्यालय अधिकारी भी मौजूद रहे।
बैठक की कार्यवाही का समापन इलाहिया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष इंजीनियर पी. एच. मुनीर ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया। उन्होंने एनसीएमईआई प्रतिनिधिमंडल के मूल्यवान मार्गदर्शन और सुझावों के लिए आभार व्यक्त किया।
अल्पसंख्यक शिक्षा का उज्ज्वल भविष्य
मुलावूर की यह बैठक एनसीएमईआई के उन सतत प्रयासों की एक कड़ी है, जो देश भर में अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए प्रक्रियाओं को सुगम बनाने हेतु चलाए जा रहे हैं। प्रो. अख्त़र के नेतृत्व में आयोग ने संस्थानों के पंजीकरण के लिए एक डिजिटल मंच शुरू करने जैसी पहल की अगुवाई की है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देना है। साथ ही, आयोग ने प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है, ताकि संविधान द्वारा दिया गया शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और संचालित करने का अधिकार सार्थक रूप से साकार हो सके।
चुंकि भारत अपने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, प्रौद्योगिकी, नवाचार और संस्थागत सुधारों के माध्यम से अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों का सशक्तिकरण समावेशी राष्ट्रीय विकास की आधारशिला बना हुआ है। इलाहिया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में हुआ यह संवाद उस सहयोगात्मक भावना का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जो इस परिवर्तन को गति दे रही है—एक ऐसा परिवर्तन जो आने वाली पीढ़ियों के लिए शैक्षिक परिदृश्य को समृद्ध करने का वादा करता है।
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 160 SAT-SAAW ग्लाइड बम खरीदने के लिए ₹811…
Cheapest Petrol In World: दुनिया में पेट्रोल की कीमतें अलग-अलग हैं. वेनेजुएला और ईरान जैसे…
US Military Laser Weapon: अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी ड्रोन और मिसाइलों…
Policybazaar share crash: IRDAI के इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन पर प्रस्तावित नए नियमों से PB Fintech के…
Bihar News: बिहार में जमुई और समस्तीपुर के बाद अब बांका के मंदार पर्वत से…
Netanyahu UN Speech: संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर…