Assam Election 2026: असम में लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व का आगाज हो चुका है. राज्य की 126 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं, जहां 722 उम्मीदवारों की किस्मत अब जनता के हाथों में है. 20 मई 2026 को 15वीं विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और अगली सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को 64 के जादुई आंकड़े की जरूरत होगी.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 2.5 करोड़ मतदाता हैं. इनमें 1.25 करोड़ पुरुष और 1.25 करोड़ महिला वोटर्स शामिल हैं. इसके अलावा 343 थर्ड जेंडर मतदाता भी अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं. इस चुनाव में 18-19 वर्ष की आयु वाले 5.75 लाख युवा पहली बार वोट डालकर असम की नई सरकार चुनने में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे.
असम के इस चुनाव अभियान में पूरी तरह से मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का दबदबा देखने को मिला है. वह अपने दूसरे कार्यकाल और भाजपा-नीत NDA के लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं. इस बार सीएम हिमंता की रणनीति बेहद धारदार रही है. उन्होंने अपने प्रचार में ‘मूलवासी पहचान की राजनीति’ और ‘हिंदुत्व’ को सबसे बड़ा हथियार बनाया है.
मुस्लिम-विरोधी बयानबाजी के बीच उन्होंने महिलाओं को साधने के लिए एक बड़ा कल्याणकारी दांव भी चला है. इसके तहत राज्य की लगभग 40 लाख महिलाओं को ‘अरुणोदय’ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना के माध्यम से लुभाने का प्रयास किया गया है.
2021 के विधानसभा चुनाव की बात करें, तो एनडीए ने 126 में से 75 सीटें जीतकर सत्ता में शानदार वापसी की थी. उस वक्त भाजपा ने अकेले 60 और उसकी सहयोगी असम गण परिषद (AGP) ने 9 सीटें जीती थीं.
आगामी 2026 के चुनावी रण में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अकेले 89 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि उसने अपने सहयोगियों के लिए 37 सीटें छोड़ी हैं. इनमें असम गण परिषद (AGP) 26 सीटों पर और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BPF) 11 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
असम का यह विधानसभा चुनाव न केवल मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की राजनीतिक साख और रणनीतियों का सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट है, बल्कि यह राज्य के भविष्य की दिशा भी तय करेगा. वहीं विपक्ष भी एंटी-इंकंबेंसी और स्थानीय मुद्दों के सहारे सत्ता में वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य के 2.5 करोड़ मतदाता क्या करेंगे. ईवीएम में कैद जनता का यह फैसला ही तय करेगा कि सत्ता का असली ‘सिकंदर’ कौन होगा.
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