Amitabh Bachchan on Media: भक्ति और आस्था के शब्द जब किसी के हृदय से निकलते हैं, तो वे आराध्य के चरणों में समर्पित प्रार्थना होते हैं. लेकिन टीआरपी और सनसनी की अंधी दौड़ में जब उन्हीं पावन शब्दों को राजनीतिक युद्ध की ‘चुनौती’ बनाकर पेश कर दिया जाए, तो किसी भी निष्ठावान भक्त का आहत होना स्वाभाविक है. सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ भी हाल ही में कुछ ऐसा ही हुआ.
उन्होंने पारंपरिक जयकारा “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” अपने ब्लॉग और सोशल मीडिया पर लिखा, तो कुछ मीडिया संस्थानों ने इसे उनके कथित ‘विरोधियों के खिलाफ युद्ध उद्घोष’ बनाकर पेश कर दिया. इसपर बिग बी का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मीडिया को सख्त चेतावनी दी.
अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) और अपने नियमित ब्लॉग पर इस पूरी घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया. अमिताभ ने स्पष्ट किया कि वे अक्सर भगवान कृष्ण की स्तुति और प्रार्थना के रूप में “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” का स्मरण करते हैं. यह पूर्णतः धार्मिक और आध्यात्मिक भावना से जुड़ा उद्गार था.
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बिग बी ने बताया कि मीडिया ने इसका निरादर करते हुए इसे सनसनीखेज रूप दे दिया और लिखा—’देखिए ये अमिताभ अपने विरोधियों को चुनौती दे रहा है कि ले आओ हाथी-घोड़ा, हम अपने हथियारों से लड़ेंगे, डरेंगे नहीं!’ बिग बी ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि ‘जय श्री कृष्ण’ की पावन भावना के संदर्भ में ऐसी व्याख्या न केवल घोर निंदनीय है, बल्कि यह सनातन परंपरा और धार्मिक भावनाओं का खुला अनादर है.
अमिताभ बच्चन ने मीडिया की संवेदनहीनता और दोहरे मानदंडों पर सीधा प्रहार किया. उन्होंने लिखा कि जब किसी चर्चित हस्ती या पब्लिक फिगर से अनजाने में कोई भूल होती है, तो वे तुरंत हाथ जोड़कर क्षमा मांग लेते हैं और उसमें सुधार करते हैं. लेकिन मीडिया खुद को ऐसी जवाबदेही से परे समझता है मानो गलत संदर्भ में खबरें छापना उनका ‘जन्मसिद्ध अधिकार’ हो.
उन्होंने चेताया कि आज के डिजिटल युग में मीडिया केवल पारंपरिक तंत्र तक सीमित नहीं है, संचार का माध्यम अब उनके हाथों में भी है. उन्होंने याद दिलाया कि उनके 5 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हैं और यदि उसका 10 प्रतिशत भी उनके समर्थन में आ गया, तो दुष्प्रचार करने वालों को जवाब देना भारी पड़ जाएगा.
भारतीय सनातन संस्कृति में श्रीकृष्ण की भक्ति राग-द्वेष और सांसारिक प्रतिस्पर्धा से परे मुक्ति का मार्ग मानी जाती है. ऐसे में कन्हैया के बाल स्वरूप की वंदना को निजी लड़ाई या बदले की भावना से जोड़ना न केवल पत्रकारिता की गरिमा को तार-तार करता है, बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं पर भी चोट पहुंचाता है. अमिताभ बच्चन का यह कड़ा विरोध केवल एक सुपरस्टार का व्यक्तिगत गुस्सा नहीं, बल्कि हर उस भक्त की पीड़ा है जो अपनी आस्था को सनसनीखेज सुर्खियों की भेंट चढ़ते देखकर आहत होता है.
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