छठ पूजा बिहार और उत्तर प्रदेश का मनाया जाने वाला केवल एक त्योहार नहीं बल्कि यहां की संस्कृति व लोगो के दिलों से जुड़ा हुआ पर्व है. इस पर्व पर छठ गीतों का असर इतना गहरा होता है कि जो लोग छठ नहीं भी मनाते है, वो भी इसके मधुर गीतों में खो जाते हैं.
नहाएखाए की विधि के साथ शुक्रवार सुबह से ही घरों में छठ मैया की पूजा का उल्लास नजर आने लगा है. इसके साथ ही घरों से छठ के मधुर गीत भी सुनाई देने लगे हैं, जो भोजपुरी म्यूजिक में एक अलग जॉनर बन चुका हैं.
बिहार और पूर्वांचल की संस्कृति में गहराई से जुड़ा यह पर्व केवल लोक गीतों तक सीमित न होकर बड़े पर्दे पर भी उतर चुका है. इस साल भी छठ पूजा के अवसर पर नेशनल अवॉर्ड विनिंग डायरेक्टर नितिन चंद्रा की फिल्म ‘छठ’ वेव्स ओटीटी पर हाल ही में रिलीज हुई है. लेकिन क्या आपको पता है कि पहली बार छठ पूजा को बड़े पर्दे पर कब दिखाया गया था. आइए जानते है.
छठ पूजा पर आधारित फिल्मों का इतिहास लगभग 60 साल से भी ज्यादा पुराना है. फणी मजूमदार पहले डायरेक्टर थे जिन्होंने पहली बार छठ पूजा ( chhath puja ) को बड़े पर्दे पर दिखाया था. इस फिल्म का नाम ‘भैया’ था, जो साल 1961 में रिलीज हुई थी. नालंदा चित्र प्रतिष्ठान के बैनर तले बनी यह पहली फिल्म मगधी भाषा में थी, जिसको इतना सरल रखा गया था, कि हिंदी भाषी दर्शक भी आसानी से समझ सकते थे.
इस फिल्म में तरुण बोस, विजय चौधरी, पद्मा खन्ना, हेलेन, शुभा खोटे, अचला सचदेव और रामायण तिवारी जैसे कलाकारों ने अभिनय किया था. ‘भैया’ एक ऐसे लड़के की कहानी थी जो अपने सौतेले भाई के प्रेम पर अपना प्रेम कुर्बान कर देता है. दिलचस्प बात यह थी कि फिल्म की शुरुआत छठ पूजा से होती है और इसमें हीरो तरुण बोस छठ व्रत करते दिखाए गए थे.
इस फिल्म में हिंदी सिनेमा के दिग्गज गायक मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, उषा मंगेशकर, कमल बरोट और मन्ना डे ने प्लेबैक गीतों को आवाज दिया था. फिल्म की शुरुआत छठ पूजा के सीक्वेंस से होती है, जिसमें एक मधुर छठ गीत ‘सूपवे नरियरवे बझलीं मोरी मैया…’ यानी छठ मैया सूप और नारियल जैसी चीजों में ही खुश हो जाती हैं. इस गीत को चित्रगुप्त ने संगीतबद्ध किया था और इसके बोल विंध्यवासिनी देवी एवं प्रेम धवन ने लिखा था.
‘भैया’ को बिहार-उत्तर प्रदेश के रीजनल सिनेमा में एक महत्वपूर्ण फिल्म माना जाता है. इसने ‘लगल करेजवा में’, ‘पूरब पच्छिमवा से अइलें सोन दुलहा’ और ‘भंवरवा रहे गूंजराय’ जैसे लोकप्रिय गीत दिए. साथ ही छठ पूजा के दृश्यों के लिए भी यह फिल्म आज भी आइकॉनिक मानी जाती है.
ये भी पढ़ें: सो गया TV का ‘कॉमेडी किंग’, 74 साल की उम्र में सतीश शाह की ‘असहनीय’ बीमारी से मौत
-भारत एक्सप्रेस
Pallavi Patel Social Justice Politics: पल्लवी पटेल की राजनीति उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों के…
UP Politics; लगातार 7 जीत, निर्दलीय से अपनी पार्टी का सफर और सीबीआई कोर्ट से…
उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की रणनीति में इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, MSME,…
UP Budget 2026-27: उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के स्वास्थ्य सुधारों का ध्यान अस्पतालों के निरीक्षण, बुनियादी…
Western UP Politics: चंद्रशेखर आजाद ने संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा, गरिमा, जमीनी सक्रियता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व…
छोटे दुकानदारों और स्व-रोजगार से जुड़े लोगों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा देने के लिए…