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‘हनुमान अंश में दिखा बाबा नीम करोली का अद्भुत अवतार!’ जानें क्यों हर किसी का दिल जीत रही यह मूवी?

Hanuman Ansh Review: मात्र 2 करोड़ की लागत से बनी फिल्म इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर चर्चा का विषय बनी हुई है. बिना किसी बड़े सुपरस्टार और भारी-भरकम बजट के थिएटर्स में उतरी इस फिल्म ने अपनी कहानी, अभिनय और आध्यात्मिक भावनाओं से दर्शकों का ध्यान खींचा है. ‘हनुमान अंश’ सिर्फ बाबा नीम करोली के जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रेम, करुणा, भक्ति और निस्वार्थ सेवा के उस रास्ते को दिखाती है, जो इंसान को भीतर से बदलने का संदेश देता है. स्वतंत्रता से पहले के दौर की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म एक साधारण बालक के संत बनने की यात्रा को बेहद भावुक अंदाज में सामने लाती है.

फिल्म में बाबा नीम करोली के जीवन, हनुमान भक्ति और उनके सेवा भाव को इस तरह पिरोया गया है कि कहानी धार्मिक होने के साथ-साथ मानवीय भी महसूस होती है. यही वजह है कि कम बजट के बावजूद ‘हनुमान अंश’ दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब होती नजर आ रही है.

मासूमियत से वैराग्य का सफर(Hanuman Ansh Review)

फिल्म की कहानी बाबा नीम करोली (मूल नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा) के बचपन से शुरू होती है. अपनी मां के गुजर जाने के बाद, मासूम बालक को बताया जाता है कि मां भगवान राम के पास गई हैं और केवल वही उन्हें वापस ला सकते हैं. अपनी मां को वापस पाने की यह तड़प धीरे-धीरे बालक को अध्यात्म के रास्ते पर ले जाती है. आगे चलकर यही व्यक्तिगत दुख, हनुमान जी की अनन्य भक्ति, विनम्रता और सेवा भाव में बदल जाता है.

गृहस्थी का फर्ज भी निभाया और माया मोह से ऊपर भी रहे

बाबा अपने पिता की इच्छा मानकर विवाह करते हैं और गृहस्थ धर्म का पालन भी करते हैं. लेकिन ऊंचे आध्यात्मिक स्तर पर होने के कारण वे कभी भी सांसारिक मोह-माया के जाल में नहीं फंसते. यह फिल्म बाबा के भक्तों को यह खूबसूरत संदेश देती है कि अपने धर्म का पालन करते हुए और गृहस्थी के सारे फर्ज निभाते हुए भी एक संतुलित और पावन जीवन जिया जा सकता है.

तर्क से परे चमत्कार, पर प्रेम और भक्ति का दिखा असली रूप

फिल्म में दिखाए गए चमत्कार किसी अंधविश्वास की तरह नहीं, बल्कि हनुमान जी की अटूट भक्ति और जीवों की सेवा के स्वाभाविक परिणाम के रूप में दिखाई देते हैं. निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बाबा को कोई ‘भगवान’ बनाने के बजाय एक बेहद सरल, निष्पक्ष और करुणा से भरे संत के रूप में पेश किया है. बाबा का मूल मंत्र कि “सबको प्यार करो, सबकी सेवा करो, सबको भोजन कराओ और राम का नाम जपो”-पूरी फिल्म की रूह है.

धमाकेदार म्यूजिक और स्टार्स की एक्टिंग ने बांधा समां

विशाल चतुर्वेदी का संवेदनशील निर्देशन फिल्म को ड्रामेबाजी से दूर रखकर एक सच्चा आध्यात्मिक अनुभव बनाता है. फिल्म के गाने जैसे “ज़िद पे आ गई पार्वती” (साधु तिवारी) और “मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान” (सुनील लोधी) रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं. इसके साथ ही शोभिनव सत्या, चंदन आनंद, विहान एस हेगड़े, पूर्णिमा तिवारी और अनिल के. रस्तोगी की जबरदस्त एक्टिंग ने कहानी में जान फूंक दी है. कुल मिलाकर ‘हनुमान अंश’ एक बेहद सुकून देने वाली और आंखें खोल देने वाली फिल्म है.

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-भारत एक्सप्रेस

Dr. Arun Singh Awana

Assistant Professor of English, Shaheed Bhagat Singh College, University of Delhi

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