सोशल मीडिया पर वायरल सुनीता उरांव के रोते हुए वीडियो का फैक्ट चेक.
Fact Check: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भावुक वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है, जिसमें एक महिला खेल निदेशालय में रोते हुए अपनी आपबीती सुना रही है. दावा किया जा रहा है कि वीडियो में दिख रही महिला झारखंड की राष्ट्रीय स्तर की गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी सुनीता उरांव हैं, जो अपनी आजीविका के लिए झाड़ू-पोछा लगाने को मजबूर हैं. आइए करते हैं इस वायरल वीडियो का फैक्ट चेक.
फैक्ट चेक से स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो पूरी तरह से सत्य और प्रामाणिक है. झारखंड की 2 बार की गोल्ड मेडलिस्ट एथलीट सुनीता उरांव सचमुच रांची खेल निदेशालय में सफाईकर्मी का काम करने को मजबूर हैं और उन्होंने सरकार से स्थायी रोजगार की मांग की है.
इंटरनेट पर वायरल हो रहे वीडियो में एक महिला रिपोर्टर के सामने अपना दर्द बयां करते हुए रो पड़ती है. वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि राज्य के लिए दो गोल्ड मेडल जीतने वाली एथलीट खेल निदेशालय में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रही हैं और उन्हें समय पर वेतन भी नहीं मिल रहा है. यूजर्स इस वीडियो को शेयर कर व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं.
झारखंड की शान, गोल्ड मेडलिस्ट सुनीता उरांव आज झाड़ू-पोछा करने को मजबूर हैं!
जिस खिलाड़ी ने थ्रोबॉल और वॉलीबॉल में राज्य के लिए 2 गोल्ड सहित 5 मेडल जीते, आज गरीबी ने उसके हाथों में मेडल की जगह झाड़ू थमा दी है। वह रांची के खेल निदेशालय में ही झाड़ू-पोछा कर रही हैं।क्या देश का मान… pic.twitter.com/izEj6pxN4y
— Sutibro Goswami ( पत्रकार ) (@sutibro_goswami) September 13, 2026
जांच में यह वायरल दावा बिल्कुल सच साबित हुआ है. वीडियो में दिख रही महिला सचमुच झारखंड की थ्रो बॉल और वॉलीबॉल खिलाड़ी सुनीता उरांव ही हैं. उन्होंने तमिलनाडु और राजस्थान में राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व किया और 2 स्वर्ण, 1 रजत समेत कुल 5 पदक जीते हैं. वीडियो उसी खेल निदेशालय परिसर (मोराबादी, रांची) का है जहां वह पिछले 8-9 वर्षों से 10,000 रुपये प्रति माह पर सफाईकर्मी के रूप में कार्यरत हैं.
वीडियो में दिख रहे दृश्य और उनका बयान पूरी तरह प्रामाणिक हैं. माता-पिता के न होने और आर्थिक तंगी के कारण वह किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं. वायरल वीडियो में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की है कि उन्हें झाड़ू-पोछा लगाने के बजाय उनकी योग्यता के अनुसार सम्मानजनक पक्की नौकरी दी जाए, ताकि वह सम्मान से जी सकें.
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-भारत एक्सप्रेस
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