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बिल पर सदन में जंग! JPC को भेजा गया 130वां संविधान संशोधन विधेयक 2025, विपक्ष ने उठाये गंभीर सवाल

राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 को लोक सभा में पेश किया गया. जिसे संसद के संयुक्त समिति को विचार करने के लिए भेज दिया गया है. इस बिल में प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर अपराध के आरोपों में पद से हटाने का प्रावधान है.

अगर यह विधेयक कानून बनता है, तो इस विधेयक के अनुसार गिरफ्तारी के बाद अगर संवैधानिक पद पर बैठे कोई व्यक्ति 30 दिन तक हिरासत में रहते हैं, तो वो स्वत: पद से हट जाएंगे. चाहे पद पर बैठने वाला व्यक्ति तो पीएम, सीएम और मंत्री ही क्यों ना हो. जबकि पहले के कानून के मुताबिक अगर किसी अपराध में एमपी/एमएलए को दोषी पाया गया और दो साल से अधिक सजा हुई तो उसकी सदस्यता चली जाती है.

विपक्ष क्यों कर रहा इस विधेयक का विरोध?

गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा संसद के पटल पर पेश किये गए इस विधेयक को लेकर विपक्ष हमलावर है. विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार इस विधेयक के जरिये विपक्ष को टारगेट करेगी. अगर यह विधेयक कानून बनता है तो केंद्र सरकार को किसी भी राज्य में मौजूद विपक्ष के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों को हटाने की कानूनी छूट मिल जाएगी.

मौजूदा कानून में क्या है?

मौजूदा कानून में किसी भी नेता या मंत्री को तभी उसके पद से हटाया जा सकता है जब अदालत उसे दोषी ठहरा दे और उसे दो साल से ज्यादा की कैद की सजा सुनाई जाए.

विधेयक में क्या है खास

सत्ता पक्ष के द्वारा राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए इस विधेयक को लाया गया है. इस विधेयक में ये प्रावधान है कि अगर किसी भी मुख्यमंत्री, मंत्री या प्रधानमंत्री को किसी मामले में गिरफ्तार कर लिया जाता है और उन्हें 30 दिनों तक जेल में रखा जाता है व उस मामले में 5 साल या उससे ज्यादा की सजा हो सकती है. तो गिरफ्तारी के 31वें दिन उस व्यक्ति को पद से हटा दिया जाएगा.

ये भी पढ़ें- गंभीर आरोपों में फंसे, तो अब जाएगी पीएम, सीएम और मंत्रियों की कुर्सी, अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया बिल

विपक्ष ने क्या कहा?

विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार इस कानून का उपयोग विपक्ष को खत्म करने के लिए करेगी. क्योंकि सभी केंद्रीय एजेंसिया सत्ता पक्ष के इशारों पर काम कर रही हैं. सत्ता पक्ष को जिस नेता से परेशानी होती है, वो उसके पीछे केंद्रीय एजेंसियों को लगा देती है और गलत तरीके से उसे जेल में डाल देती है. अगर ये विधेयक कानून बन गया तो वो इसका उपयोग जरूर विपक्ष को खत्म करने के लिए करेगी.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस विधेयक की तुलना इमरजेंसी से की है. उन्होंने कहा कि ये विधेयक सुपर इमरजेंसी से भी आगे का कदम है.

– भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

गोविंद सिंह बिहार के कैमूर जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हासिल की और पटना कॉलेज, पटना से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, कंटेंट एडिटिंग, रिसर्च और न्यूज प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया। फिलहाल वह भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस विदेश नीति, राष्ट्रीय राजनीति और बिहार से जुड़े मुद्दों पर है।

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