TMC crisis
TMC MPs rebellion: पश्चिम बंगाल में चल रहा राजनीतिक ड्रामा अब दिल्ली पहुंच गया है. शनिवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) दिल्ली आ गए हैं. बता दें कि हाल के दिनों में ममता बनर्जी की पार्टी में चल रहा सियासी ड्रामा थमने का नाम नहीं ले रहा है. पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुनने को लेकर हुई भागदौड़ और अब ममता बनर्जी से पहले अभिषेक का दिल्ली पहुंचना कई बड़ी अटकलों को जन्म दे रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभीषेक बनर्जी को तय समय से एक दिन पहले दिल्ली भेजने का निर्णय लिया. वहीं, रविवार को दिल्ली में उनके कार्यक्रम को लेकर पार्टी के नेताओं के बीच अभी भी स्पष्टता नहीं है. टीएमसी के एक सांसद ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि उन्हें अभिषेक के दिल्ली दौरे या किसी संभावित बैठक की कोई जानकारी नहीं है.
टीएमसी के बागी विधायक और विधानसभा में नए विधायी दल के उपनेता संदीपन साहा ने दावा किया है कि दिल्ली में पार्टी के सांसदों के बीच भी वैसी ही स्थिति बन रही है जैसी पहले बंगाल विधानसभा में देखने को मिली थी. उनका आरोप है कि पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली की वजह से है. हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं और किसी अलग गुट को मान्यता पाने के लिए कम से कम 19 सांसदों का समर्थन जुटाना होगा. राज्यसभा में पार्टी के 13 सदस्य हैं.
सूत्रों के अनुसार, बागी नेताओं ने सांसदों से संपर्क बढ़ा दिया है और दोनों सदनों में समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं. राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी हाल में संकेत दिया था कि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है. हालांकि, वरिष्ठ टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने पार्टी में किसी बड़े टूट की संभावना से इनकार किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी टीएमसी के सांसदों को तोड़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन उनका कहना है कि ममता बनर्जी पहले भी ऐसे राजनीतिक संकटों का सामना कर चुकी हैं और इस बार भी मजबूती से उभरेंगी.
अभिषेक बनर्जी का दिल्ली दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब उन्हें सोमवार को फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूछताछ के लिए सीआईडी के सामने पेश होना है. उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर पेशी के लिए और समय मांगा था, लेकिन जांच एजेंसी ने उनकी यह मांग स्वीकार नहीं की.
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इससे पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी के भीतर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला था. पार्टी के 80 विधायकों में से 58 ने अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव का विरोध करते हुए ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का समर्थन किया और उसे प्रमुख विपक्षी समूह के रूप में मान्यता मिल गई.
-भारत एक्सप्रेस
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