AI Adoption In India: पूरी दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तरफ बढ़ रही है. चाहे छात्र हो या कॉर्पोरेट ऑफिस में काम कर रहा कोई कर्मचारी, हर कोई अपने रोजमर्रा के कामों में AI की मदद ले रहा है. अब AI हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है.
भारत में भी AI का ट्रेंड लगातार बढ़ रहा है. साल 2025 में भारत में करीब 16 फीसदी लोगों ने AI का इस्तेमाल किया और यह लगातार बढ़ रहा है. इसी बीच एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है. AI के क्षेत्र में जितनी तेजी से अमीर मुल्क आगे बढ़ रहे हैं, भारत उनसे काफी पीछे चल रहा है.
साल 2025 में जहां अमीर और गरीब देशों के बीच AI के इस्तेमाल का अंतर मात्र 9.8 फीसदी था अब यह बढ़कर 10.6 फीसदी हो गया है. AI के इस्तेमाल का यह फासला अब लगातार बढ़ रहा है.
AI अब मानव जीवन का अहम टूल बनता जा रहा है. कोई कोडर अपने कोड की जांच के लिए AI से पूछ रहा है. कोई ग्राफिक डिजाइनर अब AI की मदद से उन ग्राफिक्स को भी चुटकियों में बना दे रहा है, जिन्हें बनाने में घंटों का समय लगता था. इसे हम स्मार्टफोन की मदद से समझते हैं.
जैसे स्मार्टफोन के शुरुआती दौर में ये कुछ ही लोगों के पास थे, लेकिन बाद में सबकी जरूरत बन गई. इसी तरह से AI अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन बाद में यह सबकी जरुरत बन जाएगी. आने वाले समय में AI के क्षेत्र में भारतीयों को आगे बढ़ने की जरूरत होगी. नहीं तो विदेशी कंपनियां इस क्षेत्र में और आगे निकल जाएंगी और हम पीछे छूट जाएंगे.
भारत में जहां AI का इस्तेमाल मात्र 15.7 फीसदी लोग कर रहे हैं. वहीं दुनिया में यह 16.3 फीसदी हो रहा है. भारत के मुकाबले अमीर मुल्क इसका सबसे ज्यादा यूज कर रहे हैं. UAE जहां 64 फीसदी कर रहा है. तो वहीं सिंगापुर 61 फीसदी कर रहा है. नॉर्वे, फ्रांस और आयरलैंड भी 44 फीसदी से ऊपर AI का उपयोग कर रहे हैं.
अमीर देशों और भारत के बीच AI के इस्तेमाल में इस अंतर का कारण इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्टफोन की पहुंच है. विदेशों में जहां इंटरनेट और स्मार्टफोन तक सभी लोगों की पहुंच है. वहीं भारत में खराब आर्थिक हालात, कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्टफोन तक लोगों की पहुंच कम है.
वहीं AI के इस्तेमाल में भाषा भी काफी चुनौती पेश करती है. अधिकतर AI टूल दूसरी भाषाओं की जगह अंग्रेजी में बेहतर काम करते हैं. जिसकी वजह से भारत के अधिकतर लोग AI के इस्तेमाल में काफी पीछे रह जाते हैं.
ये भी पढ़ें- इश्क का खूनी अंजाम! एटा में अपनी ही बेटी और उसके प्रेमी पर ‘जल्लाद’ बने परिजन, पीट-पीटकर उतार दिया मौत के घाट
AI के इस्तेमाल में इसकी कीमत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. अधिकतर AI टूल काफी महंगे हैं. मसलन हम अगर ChatGPT का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो इसके लिए हमें हर महीने 1700 रुपये देने होंगे. वहीं ये AI टूल महंगे फोन में काफी बेहतर काम करते हैं. भारत में ज्यादातर लोगों के पास कम कीमत के स्मार्टफोन होते हैं. जिसकी वजह से लोग AI का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाते.
AI का इस्तेमाल सिर्फ टेक्नोलॉजी की वजह से नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था को भी उजागर करती है. अगर अमीर देश AI का भरपूर इस्तेमाल करते हैं तो ना सिर्फ उनकी प्रोडक्टविटी में बढ़ोतरी होगी, बल्कि वो इससे और ज्यादा पैसे बनाएंगे. इसलिए भारत को भी AI के इस्तेमाल में बढ़ोतरी करना जरूरी है.
-भारत एक्सप्रेस
Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने तुर्कमेनिस्तान की महिला की याचिका खारिज करते हुए…
Pushpamitra Book Review: 'गांधी का सैंतालीस' केवल इतिहास का रोजनामा नहीं, बल्कि बंटवारे की त्रासदी…
Premanand Maharaj Disciple Death: वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी…
Lucknow News: लखनऊ के विजन अपार्टमेंट में मामूली विवाद के बाद 17 वर्षीय नाबालिग बेटे…
दुर्गापूजा, दीपावली और छठ के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए रांची रेल मंडल सात…
Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुआट्स के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के बकाया वेतन…