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देश के हर हिस्से में नहीं होता है ड्राई डे, जानें क्या है इसके नियम?

Holi 2026 Dry Day: होली का नाम आते ही मन में रंगों की बौछार, गुझिया की मिठास और दोस्तों के समूह का ख्याल आता है. लेकिन अक्सर इसी मस्ती भरे माहौल में एक बात कई लोगों का मूड थोड़ा खराब कर देती है, वो है ‘ड्राई डे’ (Dry Day). लोग अक्सर सोचते हैं कि जब पूरा देश जश्न में डूबा है, तब सरकार शराब की दुकानों पर ताला क्यों लगा देती है? आइए जानते हैं इसकी पीछे की वजह और नियम.

क्या है ड्राई डे की वजह?

‘ड्राई डे’ यानी शराब की दुकानों का कानूनी तौर पर बंद होना होता है. दरअसल, होली पर सड़कों पर भीड़ होती है, हुड़दंग मचता है और रंगों की आड़ में कई बार शरारती तत्व अपनी मर्यादा भूल जाते हैं. प्रशासन का मानना है कि अगर शराब की बिक्री खुली रहेगी, तो सार्वजनिक स्थानों पर मारपीट, सड़क हादसे और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाएगा. इसलिए ये पाबंदी जश्न को रोकने के लिए नहीं, बल्कि उत्सव को ‘सुरक्षित’ रखने के लिए होती है.

देश के हर हिस्से में नहीं होता है ड्राई डे

बता दें कि यह कोई नेशनल नियम नहीं है. हर राज्य की अपनी आबकारी (Excise) नीति है. किसी राज्य में होली पर पूरी तरह ड्राई डे हो सकता है, तो किसी पड़ोसी राज्य में दुकानें खुली रहती हैं. वहीं, एक ही राज्य के दो अलग-अलग जिलों में भी हालात के हिसाब से अलग नियम हो सकते हैं. ये नियम वहां के पुलिस और जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर निर्भर करता है कि उन्हें इलाका कितना ‘संवेदनशील’ लग रहा है.

चार मौकों पर होता है ड्राई डे

ड्राई डे केवल त्योहारों तक सीमित नहीं है. भारत में मुख्य रूप से चार मौकों पर बोतलें दुकानों के अंदर ही रहती हैं:

  • राष्ट्रीय पर्व: 26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर को तो पूरे देश में सन्नाटा रहता है.
  • चुनावी मौसम: जब भी कहीं चुनाव होते हैं, मतदान से 48 घंटे पहले और वोटिंग वाले दिन ‘साइलेंस पीरियड’ के नाम पर दुकानें बंद कर दी जाती हैं, ताकि कोई शराब के जरिए मतदाताओं को लुभा न सके.
  • धार्मिक उत्सव: अलग-अलग राज्यों में महापुरुषों की जयंती या खास धार्मिक पर्वों पर स्थानीय सरकारें ड्राई डे घोषित करती हैं.
  • आपातकाल: अगर कहीं कानून-व्यवस्था बिगड़ जाए, तो प्रशासन फौरन दुकानों को बंद करने का आदेश दे सकता है.

क्या है नियम?

‘ड्राई डे’ का मतलब है दुकानों पर ‘खुदरा बिक्री’ (Retail Sale) पर रोक. अगर आपके पास पहले से स्टॉक है और आप अपने घर के दायरे में बैठकर इसे पी रहे हैं, तो यह कानून का उल्लंघन नहीं माना जाता. वहीं, सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग मचाना या पीकर सड़क पर आना हमेशा ही मुसीबत को बुलावा देना है. हालांकि अगर प्रशासन ने एक दिन के लिए दुकानों पर ताला लगाने का फैसला लेता है, तो इसे पाबंदी की तरह न देखकर एक जिम्मेदारी की तरह समझनी चाहिए.

ये भी पढ़ें: होली पर जबरन रंग लगाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, जानें कौन सा कानून देता है आपको ‘बुरा न मानो होली है’ से सुरक्षा

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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