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अमेरिका का ‘हथियार-शांति-फायदा’ मॉडल, लेकिन भारत ने नहीं खेला ये गेम

अमेरिका पर लंबे समय से ये आरोप लगते रहे हैं कि वो दुनिया भर में तनाव बढ़ाकर, हथियार सप्लाई करके फिर मध्यस्थ बनकर और आखिर में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण में मुनाफा कमाकर अपना दबदबा कायम करता है. रूस-यूक्रेन युद्ध इसका ताजा उदाहरण है. वहीं भारत ने इस अमेरिकी मॉडल को अपनाने से साफ इनकार कर दिया है.

अमेरिका का तरीका कुछ ऐसा होता है

  1. पहले किसी क्षेत्र में असुरक्षा फैलाने के लिए सैन्य गठबंधन या बयानबाज़ी करता है.
  2. फिर जब युद्ध शुरू हो जाता है तो एक पक्ष को अरबों डॉलर के हथियार देता है.
  3. युद्ध थमने लगता है तो खुद को ‘शांति दूत’ बताकर मध्यस्थता की पेशकश करता है.
  4. अमेरिकी कंपनियां युद्धग्रस्त देश में पुनर्निर्माण के ठेके लेती हैं जिनका पैसा पश्चिमी संस्थाएं देती हैं.

रूस-यूक्रेन मामले में भी यही हुआ. अमेरिका ने यूक्रेन को NATO में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जिससे रूस को खतरा महसूस हुआ और उसने हमला कर दिया. इसके बाद अमेरिका ने यूक्रेन को हथियार दिए रूस पर प्रतिबंध लगाए और अब अमेरिकी कंपनियां वहां पुनर्निर्माण के लिए तैयार हैं.

डोनाल्ड ट्रंप का दावा

डोनाल्ड ट्रंप ने तो दावा किया कि वो 24 घंटे में युद्ध खत्म कर सकते हैं लेकिन इसके पीछे उनका मकसद सिर्फ शांति नहीं बल्कि अमेरिका को फिर से वैश्विक नेता बनाना है.

बात भारत की

जब भारत-पाक तनाव बढ़ा तो ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश की. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कह दिया कि ये मामला पूरी तरह द्विपक्षीय है और किसी तीसरे देश की जरूरत नहीं है. इससे भारत ने अमेरिकी मॉडल को दक्षिण एशिया में लागू होने से रोक दिया.

इसे भी पढ़ें-लाल किले से आत्मनिर्भर भारत की गूंज, PM Modi के भाषणों में दिखा विकास का विजन

भारत की ये नीति दिखाती है कि कैसे एक देश अपनी संप्रभुता बनाए रखते हुए वैश्विक मंच पर मजबूती से खड़ा रह सकता है. आज के बहुध्रुवीय विश्व में भारत का ये रुख बाकी देशों के लिए एक मिसाल बन सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस

Pankaj kumar Pandey

मैं पंकज कुमार पाण्डेय हूं और मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण से आता हूं, जो सत्याग्रह की धरती है. मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंपारण में ही हुई है. इसके बाद मैंने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की. अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा हूं. इस दौरान रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचार प्रस्तुति से जुड़े अहम पहलू सीखने को मिले. वर्तमान में मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं, जहां मेरी विशेष रुचि राजनीति, विदेश और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी खबरों में है. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता महज एक नौकरी नहीं बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है.

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