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30 मार्च को लोकसभा में गूंजेगा ‘नक्सल मुक्त भारत’ का संकल्प, सीएम विष्णुदेव साय बोले-‘अमित शाह देंगे ‘ऑपरेशन कगार’ की फाइनल रिपोर्ट’

रिपोर्ट-मनोज सिंह


Naxal Mukt Bharat ‘Operation Kagar‘: भारत को वामपंथी उग्रवाद (LWE) के साये से पूरी तरह बाहर निकालने के लिए मोदी सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. आगामी 30 मार्च को लोकसभा में नियम 193 के तहत एक महत्वपूर्ण अल्पकालिक चर्चा होने जा रही है, जिसका शीर्षक ‘देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के प्रयास’ रखा गया है. इस चर्चा की शुरुआत शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे और टीडीपी सांसद बायरेड्डी शबरी करेंगे, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन के सामने सरकार का ‘रिपोर्ट कार्ड’ पेश करेंगे.

वहीं गौरतलब है कि अमित शाह ने बार-बार सार्वजनिक मंचों से यह दोहराया है कि 31 मार्च 2026 तक भारत के नक्शे से नक्सलवाद का नामोनिशान (Naxal Free India) मिटा दिया जाएगा. यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और बस्तर जैसे इलाकों में नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व को लगभग खत्म कर दिया है.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया भरोसा

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस संसदीय मंथन का स्वागत करते हुए इसे देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया है. सीएम साय का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में ‘डबल इंजन’ सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जंग (Operation Kagar) छेड़ दी है.

सीएम ने हाल के महीनों में हुई बड़ी मुठभेड़ों और रिकॉर्ड स्तर पर हुए आत्मसमर्पणों (सरेंडर) का जिक्र करते हुए कहा कि अब बस्तर के उन इलाकों तक विकास पहुंच रहा है जहां कभी नक्सलियों की समानांतर सरकार चलती थी. मुख्यमंत्री के मुताबिक, संसद में होने वाली इस चर्चा से न केवल सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि उन प्रभावित क्षेत्रों की जनता को भी एक कड़ा संदेश जाएगा कि उनकी सुरक्षा अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने उठाए सवाल

सरकार के दावे (Naxal Free India) के इतर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार की 31 मार्च की समयसीमा पर कड़े सवाल खड़े करते हुए कहा कि गृह मंत्री पिछले 10 सालों से नक्सलवाद खत्म करने की बात कह रहे हैं और हर बार चुनाव से पहले एक नई तारीख दे दी जाती है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब जब 31 मार्च 2026 की ‘डेडलाइन’ करीब है तो सरकार को इसके बाद कोई नया बहाना नहीं बनाना चाहिए.

इस मुद्दे पर बात करते हुए आगे बैज कहा कि ‘नक्सलवाद खत्म करने’ के नाम पर निर्दोष आदिवासियों को प्रताड़ित किया जा रहा है और बस्तर के जल, जंगल, जमीन को उद्योगपतियों के हवाले करने की साजिश रची जा रही है. उन्होंने मांग की कि सरकार केवल बंदूकों के दम पर नहीं बल्कि आदिवासियों का विश्वास जीतकर इस समस्या का समाधान निकाले.

यह भी पढ़ें: ‘पेट्रोल-डीजल पर दुनिया में मचा हाहाकार, लेकिन भारत…’, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह में क्या बोले सीएम योगी?

क्या कहता है सुरक्षा बलों का डेटा?

सुरक्षा एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में ‘ऑपरेशन कगार’ (Operation Kagar) के तहत नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे सफल अभियान चलाया गया है. बस्तर के आईजी पी. सुंदरराज के मुताबिक, दंडकारण्य के जंगलों में नक्सली संगठन अब लगभग ‘नेतृत्वविहीन’ हो गए हैं.

वहीं हाल ही में ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सीमा पर 31 नक्सलियों का मारा जाना और शीर्ष कमांडर सुकरु जैसे नेताओं का आत्मसमर्पण यह दर्शाता है कि नक्सली विचारधारा अब अपने अंतिम दौर में है. 30 मार्च को संसद में अमित शाह इन आंकड़ों के साथ यह भी बताएंगे कि कैसे सरकार ने ‘रेड कॉरिडोर’ को सिकोड़कर अब कुछ ही जिलों तक सीमित कर दिया है और भविष्य में पुनर्वास योजनाओं के जरिए बचे हुए कैडरों को मुख्यधारा में लाने का क्या प्लान है.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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