Amit Shah Operation Lotus Punjab: आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों का भाजपा में शामिल होना महज एक संयोग नहीं, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उस ‘चाणक्य नीति’ का नतीजा है, जिसकी बिसात कई हफ्तों पहले बिछाई जा चुकी थी.
सूत्रों की मानें तो राघव चड्ढा समेत इन सांसदों के बागी होने की पटकथा पिछले महीने अमित शाह की पंजाब यात्रा के दौरान ही लिख दी गई थी. 14 मार्च को मोगा में हुई ‘बदलाव रैली’ के बाद हुई एक ‘सीक्रेट मीटिंग’ ने अरविंद केजरीवाल के भरोसेमंद साथियों को पाला बदलने के लिए तैयार कर लिया था.
दरअसल 14 मार्च 2026 को जब अमित शाह पंजाब के मोगा में दहाड़ रहे थे, तभी पर्दे के पीछे ‘ऑपरेशन लोटस’ की अंतिम कड़ियाँ जोड़ी जा रही थीं. जानकार बताते हैं कि शाह ने अपनी इस यात्रा के दौरान न केवल पंजाब सरकार को घेरा बल्कि ‘आप’ के उन सांसदों से भी सीधा संपर्क साधा जो पार्टी के भीतर खुद को ‘अनदेखा’ महसूस कर रहे थे. उसी रात हुई एक गोपनीय बैठक में सांसदों को भाजपा के विजन और भविष्य की भूमिका का पूरा खाका समझा दिया गया था.
अमित शाह की पैनी नजर ‘AAP’ के भीतर सुलग रहे असंतोष पर थी. बताते चलें 2 अप्रैल को जब केजरीवाल ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटाकर अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दी, तो शाह ने इसे सही मौके के तौर पर भुनाया.
उन्होंने न केवल नाराज राघव को साधा, बल्कि नए बने नेता अशोक मित्तल को भी अपने पाले में खींच लिया. नतीजा यह हुआ कि कल जब राघव चड्ढा भाजपा मुख्यालय पहुँचे, तो उनके साथ अशोक मित्तल और संदीप पाठक जैसे ‘आप’ के ‘स्तंभ’ भी खड़े थे.
बता दें कि यह ऑपरेशन (Amit Shah Operation Lotus Punjab) अचानक शुरू नहीं हुआ था. सूत्रों के अनुसार, 2024 के अंत से ही अमित शाह के पास उन सांसदों की लिस्ट थी जो पंजाब सरकार के कामकाज और दिल्ली हाईकमान के दखल से परेशान थे.
इस बीच शाह ने रणनीति के तहत इन सांसदों को धीरे-धीरे भरोसे में लिया और उन्हें विश्वास दिलाया कि भाजपा में उनकी काबिलियत का सम्मान होगा. राघव चड्ढा का यह बयान कि “मैं अपना करियर बनाने नहीं, बल्कि करियर छोड़कर आया हूँ”, शाह द्वारा दिए गए उसी ‘सम्मान’ वाले वादे की ओर इशारा करता है.
इस पूरी बगावत (AAP Defection) में अमित शाह की सबसे बड़ी जीत संदीप पाठक को जोड़ना मानी जा रही है. संदीप पाठक, जिन्हें ‘आप’ का रणनीतिकार और पंजाब की जीत का असली चेहरा माना जाता था, उनका भाजपा में जाना केजरीवाल के लिए एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसा है. शाह ने ‘AAP’ के थिंक-टैंक को ही उखाड़कर यह साबित कर दिया है कि जब वे किसी राज्य में बदलाव का संकल्प लेते हैं, तो विपक्षी दलों के सबसे मजबूत किले भी ताश के पत्तों की तरह ढह जाते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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