आजकल के भागदौड़ भरे दौर में एक अच्छी कॉरपोरेट नौकरी, मोटी सैलरी और हाथ में क्रेडिट कार्ड होना ही सफलता का पैमाना माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर कोई आपसे कहे कि वह दोगुनी सैलरी वाला ऑफर भी ठुकरा चुका है, तो आप उसे क्या कहेंगे? लेकिन स्पेन की एक महिला, रोची (Rochi) की कहानी सुनने के बाद आप अपनी राय बदलने पर मजबूर हो जाएंगे.
रोची, जो कभी एक नामी कॉरपोरेट कंपनी का हिस्सा थीं, आज सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं. उन्होंने अपनी हाई-प्रोफाइल नौकरी सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ी कि उन्हें कुछ और करना था, बल्कि इसलिए छोड़ी ताकि वह खुद को फिर से पा सकें.
रोची का कहना है कि जब वह कॉरपोरेट दुनिया में थीं, तो उनकी सुबह अलार्म की चीख-पुकार और काम के भारी तनाव के साथ शुरू होती थी. वह किसी और की डेडलाइन को पूरा करने के लिए अपनी नींद और सुकून की बलि चढ़ा रही थीं. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुए लिखा, “लोग मुझसे पूछते हैं कि अगर तुम्हें दोगुनी सैलरी मिले तो क्या तुम वापस जाओगी? उन्हें लगता है कि मैंने नौकरी पैसों के लिए छोड़ी थी. सच तो यह है कि दुनिया की कोई भी रकम मुझे उस तनाव वाली जिंदगी में वापस नहीं ले जा सकती.”
आज रोची की सुबह डर से नहीं, बल्कि शांति से शुरू होती है. उनके लिए सुबह का यह सुकून किसी भी सात अंकों वाली सैलरी से कहीं ज्यादा कीमती है.
रोची ने एक बहुत ही गहरी बात कही जो आज के हर दूसरे कॉरपोरेट कर्मचारी की कहानी है. उन्होंने बताया कि ऑफिस में रहने के दौरान वह एक ‘किरदार’ जी रही थीं. वह कहती हैं,
‘वहां मैं अलग तरह से मुस्कुराती थी, अलग तरह से बात करती थी. मैं वह इंसान थी ही नहीं, जो मैं वास्तव में हूं.’
यह दिखावा उन्हें अंदर ही अंदर खोखला और थका रहा था. अब वह जो हैं, वही बनकर जीती हैं और उन्हें किसी बॉस को खुश करने के लिए नकली मुस्कान की जरूरत नहीं पड़ती है.
कॉरपोरेट कल्चर में ‘टॉक्सिक मैनेजर’ और जबरदस्ती निभाए जाने वाले सहकर्मियों के रिश्ते किसी से छिपे नहीं हैं. रोची ने साफ किया कि अब उनकी ऊर्जा पर सिर्फ उनका हक है. वह कहती हैं कि अब न तो कोई उन पर चिल्लाने वाला मैनेजर है और न ही वह मजबूरियां. वह खुद तय करती हैं कि उन्हें अपना वक्त और अपनी एनर्जी किसे देनी है.
हालांकि, यह सफर इतना भी आसान नहीं था. रोची ने वह दौर भी देखा जब बैंक अकाउंट खाली था, महीने भर का डर था और रात के 3 बजे तक बेचैनी में नींद नहीं आती थी. लेकिन उनका मानना है कि इस आजादी को पाने के लिए उन्होंने जो कीमत चुकाई है, वह सार्थक है. दोबारा नौकरी पर जाना उस पूरे संघर्ष का अपमान होगा.
रोची की यह कहानी इंटरनेट पर फैल गई है. खासकर 30 की उम्र पार कर चुके लोग इस कहानी से खुद को जोड़कर देख रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ सिर्फ एक शब्द बनकर रह गया है, जबकि रोची ने इसे असल जिंदगी में उतार कर दिखाया है. लोगों का कहना है कि हर किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह सुरक्षा (Security) को छोड़कर सुकून चुन सके.
यह भी पढ़ें: ‘इस साल इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजेंगे…’, आइजकमैन बोले- तीन बड़े मिशनों को अंजाम तक पहुंचाएगा NASA
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
पीएम मोदी ने लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस और प्रिंसेस सोफी से मुलाकात की. बैठक में…
करवा चौथ के पावन पर्व पर स्कूलों की छुट्टी को लेकर बच्चों और पेरेंट्स के…
सुप्रीम कोर्ट ने SIR और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के…
वंदे मातरम को राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' के समान दर्जा देने और स्कूलों में इसका गायन अनिवार्य…
IND vs NZ 3rd T20: भारत और न्यूजीलैंड के तीसरे T20 मुकाबले में भारत ने…
ग्वालियर में सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश…