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राम मंदिर जा रहे हैं तो अयोध्या में यहां कुल्हड़ वाली दही-जलेबी का ले सकते हैं लुत्फ, कीमत मात्र 20 रुपये; विदेशी भी आते हैं खाने

Kulhad Dahi Jalebi  : अयोध्या में एक जनपद एक व्यंजन के तहत “कुल्हड़ दही जलेबी” ने अपने पहचान विश्व स्तर पर बनाई है. अयोध्या में देश विदेश से भक्त जहां एक और अपने आराध्य भगवान श्री राम की जन्म स्थली में रामलला के दर्शन करने के लिए आते हैं. तो वहीं दूसरी ओर अयोध्या का सुप्रसिद्ध व्यंजन दही जलेबी का टेस्ट लेना नहीं भूलते हैं. रामपथ पर बने मौर्या मिष्ठान भंडार ने इसकी शुरुवात 1952 में अयोध्या की एक छोटी सी दुकान से की थी. आज कुल्हड़ में दही जलेबी विश्व स्तर पर एक व्यंजन के रूप में पहचान बन चुकी है. मौर्या मिष्ठान भंडार के दीप नारायण मौर्य वर्ष 2018 दिल्ली में आयोजित नेशनल स्ट्रीट फूड फेस्टिवल ऑफ इंडिया में स्टॉल लगा कर अपने व्यंजन की प्रसिद्धि प्राप्त किए.

उसके बाद से इनके जीवन में बदलाव आया आज अयोध्या जिले के व्यंजन के रूप में कुल्हड़ दही जलेबी एक पहचान बन चुकी है. अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने भी प्रदेश सरकार की एक यहां पर मिलने वाली कुल्हड़ दही-जलेबी सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि सेहत के लिहाज से भी काफी पसंद की जाती है. माना जाता है कि दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं, जबकि ताजी जलेबी ऊर्जा प्रदान करती है. सुबह के समय दही- जलेबी खाने से मूड फ्रेश होता है और एनर्जी महसूस होती है.

रोजाना 100 किलो तक बनती है जलेबी

कुल्हड़ दही जलेबी को सलेक्ट करने के लिए हलवाई समाज ने सरकार के प्रति आभार जताया . उन्होंने कहा इससे व्यापार में वृद्धि होगी. हलवाई समाज का कहना है कि यहां रोजाना बड़ी मात्रा में जलेबी तैयार कर बेची जाती है, अनुमानित रूप से लगभग 100 किलो तक जलेबी रोजाना बनती है. दही-जलेबी सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक लगातार मिलती है. कुल्हड़ दही-जलेबी की कीमत लगभग 20 रुपये रखी गई है, जिसे आम इंसान आराम से खरीदकर खा सकता है.

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दही- जलेबी को विश्व स्तर पर मिली पहचान

भारत में कुल्हड़ दही-जलेबी के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध जिला उत्तर प्रदेश का अयोध्या है. यहां राम की पैड़ी के पास और तुलसी उद्यान के नजदीक स्थित स्थानीय मिठाई की दुकानों पर यह खास व्यंजन काफी लोकप्रिय है. श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच इसकी अलग पहचान है और सुबह के नाश्ते में इसे बड़े चाव से खाया जाता है.

Swati Pandey

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