ईद-उल-अज़हा (बकरीद) के त्योहार से ठीक पहले देश की सियासत का पारा (Bakrid Controversy BJP RJD) अचानक चरम पर पहुंच गया है. महाराष्ट्र के कद्दावर बीजेपी नेता और मंत्री नितेश राणे द्वारा कुर्बानी को लेकर दिए गए एक विवादित बयान पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने बेहद तीखा और आक्रामक पलटवार किया है. राजद के मुख्य प्रवक्ता एजाज अहमद ने नई दिल्ली और पटना में मीडिया से बात करते हुए नितेश राणे के बयान को पूरी तरह से असंवैधानिक और गलत ठहराया है.
राजद का सीधा आरोप है कि जब भी अल्पसंख्यकों या मुसलमानों का कोई पवित्र त्योहार नजदीक आता है, तो भारतीय जनता पार्टी जानबूझकर कुर्बानी जैसे मजहबी मामलों को लेकर नए-नए और कड़े नियम थोपने लगती है, ताकि समाज का आपसी भाईचारा और सौहार्द पूरी तरह खराब किया जा सके.
राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने देश के कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि हमारे पवित्र संविधान में साफ-साफ शब्दों में यह लिखा गया है कि भारत में रहने वाले सभी धर्मों के लोग अपने-अपने रीति-रिवाजों और आस्था के अनुसार पर्व-त्योहार मना सकते हैं. संविधान में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि किसी भी समुदाय की धार्मिक कुर्बानी पर किसी भी तरह की कोई रोक लगाई जाए.
राजद के मुताबिक, नितेश राणे जैसे नेता सिर्फ और सिर्फ बीजेपी के छिपे हुए एजेंडे को देश में आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं, जिससे समाज के भीतर नफरत और जहर फैल रहा है. उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यह कुर्बानी की परंपरा आज की नहीं बल्कि पिछले 1400 साल से लगातार चली आ रही है और दुनिया का कोई भी गैर-मुस्लिम इसे कतई नहीं रोक सकता.
इस पूरे राजनीतिक विवाद का विश्लेषण करते हुए एजाज अहमद ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब मुस्लिम त्योहारों को टारगेट किया जा रहा है. उन्होंने बीजेपी की इस रणनीति को एक सोची-समझी क्रोनोलॉजी बताया, जिसके तहत बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच एक अघोषित दूरी पैदा करने की कोशिश की जाती है.
राजद का कहना है कि पर्व-त्योहार खुशी और एकजुटता का संदेश लाते हैं, लेकिन सत्ताधारी दल के नेता अपनी सियासी रोटियां सेंकने के लिए इन पवित्र मौकों का इस्तेमाल ध्रुवीकरण के लिए करते हैं. राणे का बयान इसी नफरती राजनीति की एक नई और खतरनाक कड़ी है, जिसका समय रहते लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है.
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अपने तीखे बयान(Bakrid Controversy BJP RJD) को आगे बढ़ाते हुए राजद प्रवक्ता ने देश और प्रदेश के अल्पसंख्यकों को एक बहुत बड़ा और खुला राजनीतिक संदेश भी दे डाला है. एजाज अहमद ने पहले के बयानों को दोहराते हुए कहा कि अगर देश के भीतर सचमुच अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़ों के हक और हितों में काम करना है, तो हर हाल में भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सांप्रदायिक एजेंडे से दूरी बनानी होगी. उनका मानना है कि जब तक देश की जनता इन नफरती ताकतों के बहकावे में आती रहेगी, तब तक विकास और रोजगार जैसे मुख्य मुद्दे हमेशा पीछे छूटते रहेंगे और समाज सिर्फ मजहबी दीवारों में ही उलझा रहेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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