बांग्लादेश में एक लंबे सियासी उतार-चढ़ाव के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था की वापसी हो गई है. आज (मंगलवार) को ढाका के बंगभवन में एक भव्य समारोह के दौरान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए दुनिया भर के दिग्गज नेता ढाका पहुंचे थे, लेकिन भारत की मौजूदगी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
भारत की ओर से इस मौके पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ढाका पहुंचे है. वैसे न्योता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी मिला था, लेकिन भारत सरकार ने अपने प्रतिनिधि के तौर पर स्पीकर को भेजकर यह साफ कर दिया कि भारत, बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों और वहां की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कितनी अहमियत देता है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पर बड़ा ही सटीक बयान जारी किया है. मंत्रालय का कहना है कि ओम बिरला की वहां मौजूदगी केवल एक प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच की उस गहरी और पक्की दोस्ती का सबूत है, जो हमारे साझा इतिहास और संस्कृति से जुड़ी है. भारत ने खुले दिल से तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि उनके विज़न से देश में स्थिरता आएगी.
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के लगभग सभी प्रमुख देशों ने इस समारोह में अपनी हाजिरी लगाई. मालदीव के राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जू खुद ढाका पहुंचे, जिनका एयरपोर्ट पर अंतरिम सरकार के विदेश सलाहकार एम तौहीद हुसैन ने जोरदार स्वागत किया. इसके अलावा भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, नेपाल और श्रीलंका के प्रतिनिधि भी वहां मौजूद रहे.
पाकिस्तान से संघीय योजना मंत्री अहसान इकबाल और ब्रिटेन की तरफ से सीमा मल्होत्रा ने शिरकत की है. हालांकि, मुख्य सलाहकार यूनुस ने एक दर्जन से ज्यादा देशों के प्रमुखों को आमंत्रित किया था, जिसमें पाकिस्तान और मलेशिया के प्रधानमंत्री भी शामिल थे.
तारिक रहमान की इस नई कैबिनेट में कुल 25 मंत्रियों को जगह दी गई है. यह पूरी तरह से BNP के दिग्गजों से भरी टीम है. लिस्ट पर नजर डालें तो इसमें मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खसरू महमूद चौधरी और सलाहुद्दीन अहमद जैसे अनुभवी चेहरों के साथ-साथ अरिफुल हक चौधरी और जहीर उद्दीन स्वपन जैसे नाम भी शामिल हैं.
कैबिनेट के कुछ मुख्य नाम इस प्रकार है,
बांग्लादेश के लिए यह एक नई सुबह की तरह है. एक तरफ जहां नई सरकार के सामने देश की अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने की चुनौती होगी, वहीं भारत के लिए यह अपने पड़ोसी के साथ रिश्तों को नए सिरे से और मजबूती के साथ आगे बढ़ाने का एक सुनहरा मौका है.
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-भारत एक्सप्रेस
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