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छत्तीसगढ़: 19 मई को 4 राज्यों के सीएम के साथ सजेगा दरबार, नक्सलवाद के ताबूत में आखिरी कील ठोकने आ रहे अमित शाह?

Bastar Anti Naxal Operation: छत्तीसगढ़ का बस्तर, जो कभी बारूदी धमाकों के लिए जाना जाता था, अब नक्सलवाद के अंत का गवाह बनने जा रहा है. 19 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जगदलपुर में ‘मध्य क्षेत्रीय परिषद’ (Central Regional Council) की एक ऐतिहासिक बैठक की अध्यक्षता करेंगे. हाल के महीनों में नक्सलियों के खिलाफ मिली बड़ी रणनीतिक सफलताओं के बाद अमित शाह का यह दौरा नक्सलियों के लिए ‘फाइनल वार्निंग’ माना जा रहा है.

नक्सलवाद का 2026 तक सफाए का संकल्प

अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि 31 मार्च 2026 के बाद बस्तर की धरती पर नक्सलवाद के नाम पर खून की एक बूंद भी नहीं गिरेगी. 19 मई की यह बैठक इसी ‘डेडलाइन’ को पूरा करने का रोडमैप तैयार करेगी. हाल ही में छत्तीसगढ़ में 280 से ज्यादा नक्सलियों का खात्मा और करीब 1000 गिरफ्तारियां इस बात का सबूत हैं कि केंद्र और राज्य सरकार अब ‘आर-पार’ के मूड में है.

योगी, मोहन और धामी भी रहेंगे मौजूद (Bastar Anti Naxal Operation)

बस्तर के इस हाई-प्रोफाइल मंथन में सिर्फ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल होंगे. इन राज्यों के बीच आपसी समन्वय, सीमा सुरक्षा और नक्सलियों के भागने के रास्तों को ब्लॉक करने पर ठोस रणनीति बनेगी.

‘लाल गलियारा’ अब बनेगा ‘विकास गलियारा’

अमित शाह का फोकस सिर्फ बंदूक पर नहीं बल्कि बस्तर के विकास पर भी है. बैठक में चर्चा होगी कि कैसे माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्कूल और अस्पताल पहुँचाए जाएं.

नियद नेल्लानार (Niyad Nella Nar): इस योजना के तहत सुरक्षा कैंपों के 10 किमी दायरे में आने वाले गांवों को तेजी से मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है.

बुनियादी ढांचा: दिसंबर 2027 तक हर गांव में बिजली और हर 5 किमी पर बैंक शाखा या पोस्ट ऑफिस खोलने का लक्ष्य है.

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18 मई की रात जगदलपुर में शाह

गृह मंत्री 18 मई की रात को ही जगदलपुर पहुँच जाएंगे. उनका बस्तर में रात्रि विश्राम करना सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने के लिए एक बड़ा ‘सांकेतिक संदेश’ है. वे जवानों से मुलाकात कर सकते हैं और शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए नक्सलियों को सरेंडर कर मुख्यधारा में लौटने की आखिरी अपील भी कर सकते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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