अंजनी कुमार कश्यप/ भागलपुर
Bhagalpur Traffic Update: भागलपुर और कोसी-सीमांचल के लाखों लोगों के लिए आज राहत और खुशी का बड़ा दिन है. पिछले 3 मई की रात से बंद पड़े विक्रमशिला सेतु (Vikramshila Bridge) पर आखिरकार आवाजाही फिर से शुरू हो गई है. क्षतिग्रस्त हिस्से पर रिकॉर्ड समय में तैयार किए गए बेली ब्रिज का उद्घाटन बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने फीता काटकर और नारियल फोड़कर किया.
33 दिनों के लंबे इंतजार के बाद विक्रमशिला सेतु पर छोटे वाहनों के लिए बेली ब्रिज खोल दिया गया है. बीआरओ (BRO) और पथ निर्माण विभाग की टीम ने दिन-रात मेहनत कर महज 16 से 20 दिनों में इस चुनौतीपूर्ण काम को पूरा किया, जिससे लोगों को लंबे रास्ते के चक्कर से मुक्ति मिली है.
भागलपुर में विक्रमशिला सेतु पर बने इस नए बेली ब्रिज के उद्घाटन समारोह में गरिमामयी उपस्थिति रही. इस मौके पर बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र के साथ पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल, जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार समेत कई आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे.
उद्घाटन के तुरंत बाद जैसे ही पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू हुई, पिछले एक महीने से परेशान चल रहे आम लोगों के चेहरे खिल उठे.
समारोह के दौरान बेली ब्रिज के निर्माण में रात-दिन एक करने वाले अधिकारियों, अभियंताओं (इंजीनियर्स) और श्रमिकों को उनकी इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया. मंत्री कुमार शैलेंद्र ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि भीषण गर्मी और विषम परिस्थितियों के बावजूद बीआरओ (BRO) की टीम ने अद्भुत समर्पण का परिचय दिया.
टीम ने दिन-रात मेहनत कर महज 16 से 20 दिनों के भीतर इस बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा कर तय समय से पहले पुल जनता को सौंप दिया.
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन और बीआरओ की टीम लगातार आपसी समन्वय बनाकर काम कर रही थी. उन्होंने आश्वस्त किया कि जनता से किया गया वादा समय पर पूरा हुआ है और यह पुल पूरी तरह सुरक्षित है.
बड़े-बड़े क्रेन और रोलर चलाकर सफल परीक्षण (ट्रायल) करने के बाद ही इसे आम लोगों के लिए खोला गया है. हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से फिलहाल पुल पर वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू रहेगी और इसकी नियमित निगरानी व दैनिक मेंटेनेंस भी की जाएगी (Bailey Bridge Inauguration).
विक्रमशिला सेतु सिर्फ एक पुल नहीं है, बल्कि यह अंग, कोसी और सीमांचल के जिलों को आपस में जोड़ने वाली बेहद महत्वपूर्ण जीवनरेखा है. पिछले 3 मई से इसके बंद होने के कारण लोगों को बेहद लंबा रास्ता तय करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा था. आज जब इस जीवनरेखा पर फिर से वाहनों के पहिए घूमने लगे हैं, तो लोगों में राहत और खुशी साफ देखी जा सकती है.
रिकॉर्ड समय में बने इस पुल ने साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही तकनीक से हर चुनौती को पार किया जा सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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