चिराग के सीटों की डिमांड के पीछे का कारण
Bihar Election 2025: चुनाव आयोग की घोषणा के साथ ही बिहार के सियासी गलियारों में एक अघोषित ‘महाभारत’ शुरू हो गया है. इसका केंद्र राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीटों का बंटवारा. समय कम है और चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) यानी LJP-R की 35 सीटों की मांग ने पूरे गठबंधन को सस्पेंस मोड में डाल दिया है. भाजपा उन्हें 20 से अधिक सीटें देने को तैयार है, वहीं चिराग की ‘जिद’ ने गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के हस्तक्षेप की स्थिति पैदा कर दी है.
एनडीए में सीट बंटवारे (NDA Seat Sharing Bihar Election) को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान 35 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं. बीजेपी उन्हें 20 से ज्यादा सीटें देने को तैयार है, लेकिन चिराग अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. ऐसे में अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. एक तबके का कहना है कि क्या चिराग पासवान अगले मौसम वैज्ञानिक बनने जा रहे हैं.
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा से भी सीट बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है. दोनों नेताओं ने अपने-अपने दलों के लिए 15-15 सीटों की मांग की है. इस बीच चिराग सिर्फ सीटें ही नहीं मांग रहे. उन्होंने भाजपा और जेडीयू के सिटिंग विधायकों वाली सीटों पर भी दावा ठोक दिया है, जिससे साफ है कि यह सिर्फ सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि बिहार की भावी राजनीति में अपनी हैसियत तय करने की निर्णायक लड़ाई है.
बिहार चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है. इस बीत NDA में सीटों का बंटवारा (Bihar Election NDA Alliance) इस समय किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं है. जहां मांझी और कुशवाहा जैसे सहयोगियों को मना लिया गया है, वहीं चिराग पासवान का 35 सीटों का अड़ियल रुख गठबंधन के आगे के प्लान पर रोक लगा रखी है. चिराग का यह राजनीतिक दांव सिर्फ सीटें हथियाना नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव के सामने खुद को सबसे मज़बूत युवा दलित नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश है.
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बीजेपी ने अपने 40 सिटिंग विधायकों को चुनाव प्रचार की हरी झंडी दे दी है. इन विधायकों का रिपोर्ट कार्ड बेहतर होने के कारण इन्हें चुनाव प्रचार की अनुमति मिली है. अब देखना यह है कि अमित शाह और जेपी नड्डा एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर इस गतिरोध को कैसे तोड़ते हैं. क्या वे चिराग की मांग पूरी कर एक मज़बूत गठबंधन बनाए रखेंगे या वह बीच का कोई रास्ता निकालकर बिहार चुनाव में जाएंगे.
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