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चाहे कोई भी हो… पीड़िता की पहचान पर लक्ष्मण रेखा क्यों? समझिए पूरा कानून

Bihar Jamui Case: मामला बिहार के जमुई का है. एक नाबालिग पीड़िता से जुड़ी घटना के बाद उसकी और उसके परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई. तस्वीर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया अकाउंट से साझा की गई थी. मामला बढ़ा तो मुख्यमंत्री कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ पटना के सचिवालय थाने में FIR दर्ज की गई.

अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि तस्वीर किसने पोस्ट की. बड़ा सवाल यह है कि आखिर यौन अपराध की पीड़िता की पहचान को लेकर कानून इतना सख्त क्यों है?

पीड़िता की सुरक्षा है मकसद

किसी यौन अपराध की पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना कानून की नजर में गंभीर मामला है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है पीड़िता की सुरक्षा. पहचान सामने आने पर उसे सामाजिक दबाव, बदनामी और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही, मामले की जांच और गवाहों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है.

यही वजह है कि कानून ने पीड़िता की पहचान के मामले में एक स्पष्ट सीमा तय की है.

अगर कोई पहचान उजागर करता है तब?

भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 72 के तहत यौन अपराध की पीड़िता की पहचान उजागर करना अपराध है. सिर्फ नाम बताना ही नहीं, बल्कि फोटो, पता, स्कूल, कॉलेज, कार्यस्थल या ऐसी कोई भी जानकारी साझा करना भी प्रतिबंधित है, जिससे पीड़िता की पहचान हो सके. इस नियम को तोड़ने पर दो साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है.

अगर पीड़िता की उम्र 18 साल से कम है, तो मामला और संवेदनशील हो जाता है. ऐसे मामलों में POCSO Act की धारा 23 लागू होती है. इसके तहत बच्चे की पहचान सार्वजनिक करने पर सख्त रोक है.

सिर्फ दी जा सकती है घटना की जानकरी

बीएनएस की धारा 72 यह संदेश देता है कि पीड़िता के साथ हुई घटना की जानकारी तो दी जा सकती है, लेकिन उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती.

ये भी पढ़ें- West Bengal Crime: मेदिनीपुर में BJP कार्यकर्ता की पीटकर हत्या का आरोप, गुटबाजी के विवाद से जुड़ा मामला

इसी वजह से किसी भी मामले में मीडिया, सोशल मीडिया यूजर या कोई सार्वजनिक व्यक्ति- हर किसी को पीड़िता की पहचान से जुड़ी जानकारी साझा करते समय इस कानूनी सीमा का ध्यान रखना जरूरी है.

(ये खबर सान्या सिंह ने लिखी है. सान्या भारत एक्सप्रेस में इंटर्न हैं)

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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