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बीजेपी सांसद दिनेश शर्मा ने विपक्ष पर बोला तीखा हमला, कहा- “सिर्फ बयानबाजी से कुछ नहीं होता…”

देश में परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए सरकार लगातार कड़े कदम उठा रही है. इसी कड़ी में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर सियासत और बयानबाजी भी तेज हो गई है. हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के सांसद दिनेश शर्मा ने इस कानून की वकालत करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला है.

विपक्ष पर बरसे दिनेश शर्मा

सांसद दिनेश शर्मा ने एक तीखे बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा व्यवस्था से नकल और पेपर लीक के काले साए को हमेशा के लिए मिटाने का पुख्ता बंदोबस्त कर दिया है. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ बयान देने और चिंता जताने से कुछ नहीं होता, बल्कि ऐसे ठोस कदम उठाने पड़ते हैं जिससे गलत काम करने वालों के हौसले पस्त हो जाएं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस नए कानून के तहत पेपर लीक या नकल कराने वालों के खिलाफ इतनी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है कि उनकी आने वाली तीन पीढ़ियां भी उसे याद रखेंगी.

आज का युवा है डिजिटल

दिनेश शर्मा ने युवाओं की तारीफ करते हुए कहा कि आज का देश का युवा बहुत समझदार है. वह डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्टार्टअप की भाषा समझता है. यह वह युवा है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के दौर में अपनी मेहनत से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने साफ कहा कि ऐसे होनहार और आधुनिक युवाओं को विपक्ष के बहकावे में आसानी से नहीं लाया जा सकता.

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क्या है एंटी-पेपर लीक कानून?

आपको बता दें कि परीक्षाओं में होने वाली धांधली, नकल और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर नकेल कसने के लिए ही सरकार यह ‘एंटी-पेपर लीक कानून’ (सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम) लेकर आई है. इस कड़े कानून के दायरे में UPSC, SSC, बैंक, रेलवे और राज्य स्तर की तमाम भर्ती परीक्षाएं आती हैं.

इस कानून के तहत पेपर लीक या नकल कराने जैसे मामलों में संलिप्त पाए जाने पर 3 से लेकर 10 साल तक की भारी-भरकम जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. हालांकि जब यह कानून लाया गया था तब विपक्ष ने इसे लेकर तीखा विरोध जताया था.

विपक्षी दलों का तर्क था कि इसके कुछ प्रावधान बहुत ज्यादा सख्त हैं और इससे छात्रों या छोटे स्तर के कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बढ़ सकता है जबकि सत्ता पक्ष का साफ कहना है कि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य बचाने के लिए इतने कड़े और कठोर कदम उठाना बेहद जरूरी था.

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-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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