Ghulam Ali Khatana On India Pakistan Dialogue: भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने के लिए दोनों मुल्कों के 117 प्रमुख बुद्धिजीवियों और राजनेताओं ने एक साझा पत्र लिखकर पीएम नरेंद्र मोदी और पाक पीएम शहबाज शरीफ से बातचीत शुरू करने की गुहार लगाई है. दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता बहाली के मकसद से लिखे गए इस खत पर भारत की तरफ से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और आरजेडी सांसद मनोज झा समेत कई दिग्गजों के दस्तखत हैं. इस इस ‘अमन की चिट्ठी’ पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बेहद कड़ा और दो टूक रुख अख्तियार किया है. आइये जानें सांसद गुलाम अली खटाना ने क्या कहा?
भारत की विदेश नीति के उस अडिग संकल्प को बयां करता है, जिसमें साफ कहा गया है कि आतंकवाद और बातचीत कभी एक साथ नहीं चल सकते. बीजेपी राज्यसभा सांसद गुलाम अली खटाना ने इस पत्र पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के साथ किसी भी संवाद के लिए ‘पीओके’ (PoK) को खाली करने की पहली और आखिरी शर्त रख दी है.
भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने दो मुल्कों के बीच संवाद की वकालत करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए साफ कहा कि पाकिस्तान के साथ चर्चा का एजेंडा अब सिर्फ एक ही शर्त पर तय होगा. खटाना ने कहा, कि जम्मू-कश्मीर का जो इलाका पाकिस्तान के अवैध और नाजायज कब्जे (PoK) में है, पाकिस्तान वहां के मासूम लोगों पर जुल्म करना बंद करे और तत्काल उस जमीन को खाली करे, ताकि पूरे क्षेत्र में स्थायी अमन-शांति कायम हो सके.
सांसद ने भारत की सुरक्षा नीति का हवाला देते हुए दो टूक लहजे में कहा कि जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं को खाली नहीं करता, तब तक आगे कोई बात नहीं होगी. उन्होंने पाकिस्तान की बदहाली पर तंज कसते हुए कहा कि जिसने हमारे साथ ही आजादी ली, उसने अपने मुल्क में कोई बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) नहीं बनाया. उसने सिर्फ दरिंदगी चुनी और हमारे प्यारे जम्मू-कश्मीर के भीतर आतंकवाद और खून-खराबा फैलाया.
साझा पत्र पर दस्तखत करने वाले भारतीय नेताओं, विशेषकर घाटी के क्षेत्रीय दलों पर निशाना साधते हुए गुलाम अली खटाना ने उनके इरादों पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसे नेता हमेशा दुश्मन देश के एजेंडे के साथ खड़े नजर आते हैं. खटाना ने पूछा कि क्या इन नेताओं को जम्मू-कश्मीर में दशकों तक रही तबाही, बर्बादी, हड़तालों (बंद काल), और मासूम बच्चों के यतीम होने के खूनी मंजर से सुकून नहीं मिला, जो वे फिर से पाकिस्तान से हाथ मिलाने की वकालत कर रहे हैं?
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सांसद खटाना ने याद दिलाया कि हमारी जांबाज सेनाओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत हमेशा पाकिस्तान की कायराना हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देकर उसे इतिहास की सबसे बड़ी सीख दी है. इसलिए, पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी और घाटी के नेताओं द्वारा रची जा रही कूटनीति की यह बिसात भारत स्वीकार नहीं करेगा. संवाद की मेज तभी सजेगी, जब पाकिस्तान भारत की संप्रभुता का सम्मान करते हुए अवैध कब्जे वाले कश्मीर को पूरी तरह खाली कर देगा.
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