Bottled Water History: आज के समय में बोतलबंद पानी का इस्तेमाल सभी लोग करते हैं. छोटी प्लास्टिक की बोतल हो, कांच की बड़ी बोतल हो या फिर री-यूज़ कंटेनर हर जगह पैकेज्ड वॉटर मौजूद है. यह नहीं इसे माडर्न जरूरतें या फैशन भी कह सकते हैं. लेकिन क्या आप जानते है कि हर रोज इस्तेमाल होने वाले बोतलबंद पानी की शुरुआत कहा से हुई और इसका इतिहास क्या था? आइए जानते हैं.
इतिहासकारों के मुताबिक पानी को पैक करके बेचने का विचार प्राचीन रोम से जुड़ा है. रोमन साम्राज्य के दौर में लोग मिट्टी के बर्तनों में प्राकृतिक झरनों का पानी भरकर शहरों तक ले जाते थे. खासतौर पर जर्मनी के अपोलिनारिस जैसे इलाकों का मिनरल वाटर सबसे पहले बेचा जाने लगा. उस दौर में कांच की बोतलें बनती थीं, लेकिन पानी भरने के लिए उनका इस्तेमाल महंगा था. इसलिए अधिकतर मिट्टी के बर्तन ही प्रयोग होते थे.
पांचवीं शताब्दी तक यूरोप और मध्य पूर्व में श्रद्धालु तीर्थस्थलों से पवित्र कुओं और झरनों का पानी घर ले जाने लगे. माना जाता था कि इस पानी में बीमारियों को दूर करने की ताकत होती है. आयरलैंड में तो आज भी 3,000 से ज्यादा पवित्र कुएं मौजूद हैं. उस समय पानी को सुरक्षित रखने के लिए चीनी मिट्टी की कुप्पियों का इस्तेमाल किया जाता था, जिन पर खास मुहर लगाई जाती थी ताकि पानी की असलियत साबित हो सके.
14वीं–15वीं शताब्दी में यूरोप के मशहूर स्पा टाउन सामने आए. औद्योगिक क्रांति के समय शहरों का पानी गंदा और बीमारियों से भरा हुआ था. अमीर वर्ग गर्मियों में स्पा जाते, वहां का मिनरल वाटर पीते और स्वस्थ महसूस करते थे. यह न सिर्फ सेहत का हिस्सा था बल्कि एक स्टेटस सिंबल भी बन गया. धीरे-धीरे लोग स्पा का पानी बोतलों में भरकर घर ले जाने लगे. स्लोवेनिया का रोगास्का स्लातिना स्पा इस परंपरा का बड़ा उदाहरण है, यहां 1665 में कांच का कारखाना शुरू हुआ और 18वीं सदी के अंत तक हर साल 20,000 से अधिक बोतलें बनने लगीं.
अमेरिका में पहली बार बोतलबंद पानी 1767 में बोस्टन के जैक्सन स्पा में बेचा गया. लोग एक तांबे के सिक्के से झरनों का पानी खरीदते थे. उस समय जॉर्ज वॉशिंगटन और थॉमस जेफरसन जैसे बड़े नेता भी मिनरल वाटर के शौकीन थे.
1770 के दशक में साराटोगा स्प्रिंग्स जैसे प्राकृतिक झरने प्रसिद्ध हो गए. माना जाता था कि इन झरनों का पानी खास खनिजों से भरपूर है, जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं. 19वीं सदी तक अमेरिका में बोतलबंद पानी दवा की दुकानों पर बिकता था और इसे औषधीय पेय की तरह देखा जाता था.
1767 में वैज्ञानिक जोसेफ प्रीस्टली ने कृत्रिम रूप से कार्बोनेटेड पानी का आविष्कार किया और फिर बाद में 1783 में श्वेप्स कंपनी ने इसकी बोतलें बेचना शुरू किया. यही से सोडा और मिनरल वॉटर का कारोबार तेज़ी से बढ़ा. अमेरिका में पोलैंड स्प्रिंग (1845), माउंटेन वैली (1871) और डियर पार्क (1873) जैसी कंपनियां इसी दौर में शुरू हुईं और आज भी मौजूद हैं.
शुरुआत में कांच की बोतलें बोतलबंद पानी की पहचान थीं. लेकिन जब प्लास्टिक का चलन बढ़ा तो पानी को स्टोर और ट्रांसपोर्ट करना बहुत आसान हो गया. यही वजह है कि 20वीं सदी में बोतलबंद पानी पूरी दुनिया में मशहूर हो गया. आज बोतलबंद पानी सिर्फ सुविधा का साधन नहीं बल्कि एक बड़ा बिजनेस भी बन चुका है.
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-भारत एक्सप्रेस
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