देश

क्या है कावेरी जल विवाद? सीएम विजय ने क्यों टाली बेंगलुरु यात्रा, जानें कर्नाटक-तमिलनाडु विवाद का पूरा इतिहास

Kaveri River Water Dispute: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (CM Vijay) ने 3 अगस्त को होने वाला अपना बेंगलुरु दौरा फिलहाल स्थगित कर दिया है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivkumar) ने कावेरी जल विवाद को लेकर राज्य में बने तनावपूर्ण माहौल का हवाला देते हुए बैठक टालने का अनुरोध किया था. दरअसल, कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को 29 जुलाई से अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है. इस फैसले के बाद कर्नाटक के कई इलाकों, खासकर मांड्या में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए.

बैठक पर अंतिम फैसला लेने से पहले मुख्यमंत्री विजय ने जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की. बताया गया कि मौजूदा हालात में दोनों राज्यों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत के लिए माहौल अनुकूल नहीं है. यह बैठक कावेरी जल बंटवारे और मेकेदातु जलाशय परियोजना जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रस्तावित थी, लेकिन कर्नाटक की अपील खारिज होने और बढ़ते विरोध के कारण इसे फिलहाल टाल दिया गया है. आइए जानते हैं क्या है तमिलनाडु और कर्नाटक का कावेरी जल विवाद.

क्या है कावेरी जल विवाद का इतिहास?

कावेरी नदी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कई दशकों से जल बंटवारे का विवाद चल रहा है (What is Kaveri Water Dispute?). दोनों राज्यों की खेती और लाखों लोगों की पानी की जरूरतें इस नदी पर निर्भर हैं. हर साल बारिश कम या ज्यादा होने पर यह विवाद और गहरा जाता है, क्योंकि दोनों राज्य अपने-अपने हिस्से का पानी मांगते हैं.

इस विवाद की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुए 1892 और 1924 के समझौतों से जुड़ी है. इन समझौतों में तत्कालीन मद्रास प्रेसिडेंसी (अब तमिलनाडु) को कावेरी के पानी का बड़ा हिस्सा मिला था. कर्नाटक का कहना है कि ये समझौते उस समय की परिस्थितियों में हुए थे और अब राज्य की आबादी, खेती और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों की पानी की जरूरत काफी बढ़ गई है, इसलिए उसे ज्यादा पानी मिलना चाहिए. वहीं, तमिलनाडु का कहना है कि उसके लाखों किसान कावेरी के पानी पर निर्भर हैं और यदि तय मात्रा में पानी नहीं मिला तो खासकर डेल्टा क्षेत्र की धान की फसल को भारी नुकसान होगा.

कानूनी लड़ाई में क्या-क्या हुआ?

कावेरी जल विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार और न्यायपालिका ने कई अहम कदम उठाए हैं. साल 1990 में केंद्र सरकार ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (CWDT) का गठन किया था. करीब 17 साल की सुनवाई के बाद 2007 में ट्रिब्यूनल ने अपना फैसला सुनाया और कावेरी नदी का पानी कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के बीच बांटने का वार्षिक फार्मूला तय किया.

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने साल 2018 में अपना अंतिम फैसला सुनाया. अदालत ने कावेरी को राष्ट्रीय महत्व का साझा संसाधन मानते हुए कर्नाटक के हिस्से में कुछ बढ़ोतरी की और तमिलनाडु के लिए 177.25 टीएमसी (हजार मिलियन घन फीट) पानी सालाना तय किया. साथ ही, पानी के बंटवारे पर नजर रखने और अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और कावेरी जल नियामक समिति (CWRC) का गठन भी किया गया.


ये भी पढ़ें: ‘मैं सिर्फ 15 साल की हूं… मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई’, पीएम को अपशब्द कहने वाली लड़की का माफीनामा, VIDEO वायरल


यह विवाद बार-बार क्यों भड़क उठता है?

कावेरी जल विवाद आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हर साल बारिश एक जैसी नहीं होती. जब मानसून कमजोर रहता है और कर्नाटक के बांधों में पानी कम होता है, तो राज्य सरकार पहले अपने किसानों और बेंगलुरु समेत अन्य शहरों की जरूरतों को प्राथमिकता देने की बात कहती है. ऐसे में तमिलनाडु को तय मात्रा में पानी छोड़ने को लेकर विवाद बढ़ जाता है.

हाल के दिनों में भी यही स्थिति देखने को मिली है. कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के पानी छोड़ने के निर्देश के बाद कर्नाटक में किसान संगठनों और कई कन्नड़ संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिए. इसके चलते कई बार बंद, प्रदर्शन और राजनीतिक तनाव की स्थिति बन जाती है, जिससे दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे का मुद्दा फिर से गरमा जाता है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

Recent Posts

‘सेवा संकल्प’ कार्यक्रम में एक मंच पर आए देश-दुनिया के दिग्गज, पीएम मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन पर चर्चा

नई दिल्ली में आयोजित ‘सेवा संकल्प – राष्ट्रनिर्माण के 25 साल’ समारोह में सेवा, सद्भाव…

32 minutes ago

नाना पाटेकर की पत्नी नीलकांति पाटेकर कौन हैं, 35 साल से क्यों हैं अलग? जानिए उनकी जिंदगी, करियर और रिश्ते की पूरी कहानी

नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी पत्नी नीलकंती पाटेकर चर्चा में हैं. जानिए मराठी…

33 minutes ago

जंतर-मंतर प्रदर्शन: यूथ कांग्रेस की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट आज करेगा सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के…

33 minutes ago

‘मुझे क्यों नहीं..’ भारी दर्द में हैं डोनाल्ड ट्रंप! नोबेल कमेटी को क्या-क्या ताने मारे?

Donald Trump On Nobel Peace Prize: नोबेल शांति पुरस्कार 2026 के ऐलान से पहले डोनाल्ड…

43 minutes ago

पटना में सीईसी के खिलाफ आंदोलन पर सांसद मनोज झा बोले- ‘लोकतंत्र के लिए यह मुश्किल समय, अब निरंतरता में होंगे प्रदर्शन’

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश…

43 minutes ago