दुनिया के संघर्षग्रस्त इलाकों और संकट की चपेट में फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भारत हमेशा तैयार रहा है. अपने लोगों के प्रति इस अटूट समर्पण के कई जीवंत उदाहरण सामने आते रहे हैं. एक नई रिपोर्ट में इसी आधार पर साफ दावा किया गया है कि विदेशों में अपने नागरिकों की रक्षा और सहायता के मामले में भारत दुनिया के सबसे ‘सक्रिय और जवाबदेह’ देशों में शुमार है.
हाल के वर्षों में, ये प्रयास “तेज, अच्छी तरह से समन्वित और बड़े पैमाने पर चलाए गए निकासी अभियानों” के माध्यम से पूरे किए गए हैं.
टाइम्स कुवैत की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने न केवल अपने नागरिकों को बचाया है, बल्कि आपात स्थितियों के दौरान विदेशी नागरिकों को निकालने में भी मदद की है; इस मानवीय दृष्टिकोण और अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता की भावना के लिए उसे वैश्विक सराहना मिली है.
रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है, “तेज कूटनीतिक जुड़ाव, सरकारी एजेंसियों के बीच निर्बाध समन्वय और कुशल सैन्य लॉजिस्टिक्स के माध्यम से, हजारों भारतीयों को खतरनाक स्थितियों से सुरक्षित घर वापस लाया गया है. ऑपरेशन राहत, ऑपरेशन संकट मोचन, ऑपरेशन गंगा और ऑपरेशन कावेरी जैसी प्रमुख निकासी पहलों ने हजारों लोगों को संघर्ष-ग्रस्त क्षेत्रों से निकलने और सुरक्षित घर लौटने में मदद की है.”
रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिकी और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के दौरान भारतीय सरकार ने घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखी और सभी संभावित माध्यमों से निकासी प्रयासों को तेज किया. भारतीय अधिकारियों ने स्वदेश लौटने की ख्वाहिश रखने वाले नागरिकों के लिए हवाई किराए को स्थिर और किफायती बनाए रखने के लिए भी कदम उठाए.
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक बयान में कहा, “विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. हम उन घटनाक्रमों के प्रति उदासीन नहीं रह सकते जिनका उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.”
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत लौट रहे कई यात्रियों ने भारतीय सरकार के समय पर हस्तक्षेप के लिए उसका धन्यवाद किया.
देश भर के हवाई अड्डों पर परिवारों ने संघर्ष-ग्रसित खाड़ी क्षेत्र से लौट रहे अपने रिश्तेदारों का स्वागत किया और भारतीय अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई की सराहना की.
2025 के मध्य में ईरान-इजरायल तनाव के दौरान, भारत ने अपने नागरिकों को संघर्ष क्षेत्रों से निकालकर पड़ोसी देशों में पहुंचाया और फिर उन्हें हवाई जहाज से स्वदेश ले आया.
रिपोर्ट में बताया गया है, “ऑपरेशन सिंधु नामक इस अभियान के तहत, निकाले गए लोगों को विशेष उड़ानों से भारत भेजने से पहले आर्मेनिया के रास्ते ले जाया गया. बचाए गए कई लोगों ने इस प्रक्रिया को सुचारू और सुव्यवस्थित बताया; उनके लिए यात्रा की व्यवस्था होने तक आरामदायक जगहों पर अस्थायी आवास की व्यवस्था की गई थी.”
कश्मीर की रहने वाली सेहरिश रफीक ने कहा कि भारतीय दूतावास द्वारा दी गई सहायता देखकर उन्हें सुखद आश्चर्य हुआ. टाइम्स कुवैत ने रफीक के हवाले से लिखा, “शुरुआत में, मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि दूतावास हमारे लिए इतनी मेहनत करेगा. कश्मीर के सभी लोग भारतीय सरकार के सचमुच आभारी हैं.”
एक अन्य भारतीय नागरिक, पुलवामा के मीर मोहम्मद मुशर्रफ ने कहा कि यह अभियान बेहद मददगार रहा और उन्होंने उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दूतावास की सराहना की.
इसी तरह, रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, भारत ने ‘ऑपरेशन गंगा’ शुरू किया और 18 देशों के 147 विदेशी नागरिकों के साथ-साथ 23,000 से ज्यादा नागरिकों को वहां से निकाला. रिपोर्ट में बताया गया है कि निकाले गए लोगों को पहले पोलैंड, रोमानिया, हंगरी, स्लोवाकिया और मोल्दोवा जैसे पड़ोसी देशों में ले जाया गया, और उसके बाद उन्हें विशेष नागरिक और सैन्य उड़ानों से भारत वापस लाया गया.”
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-भारत एक्सप्रेस
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