रिपोर्ट- तनु चौधरी
बेंगलुरु: कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) ने चिंता जताई है. पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्यों ने बेंगलुरु के चार सरकारी स्कूलों का दौरा किया और वहां छात्रों, शिक्षकों तथा स्कूल स्टाफ से सीधे बातचीत कर जमीनी हालात समझने की कोशिश की.
CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका, राष्ट्रीय सचिव अफरीन नवाज और कर्नाटक टीम के सदस्यों ने स्कूलों में कक्षाओं, शिक्षकों की उपलब्धता, साफ-सफाई, शौचालय और स्कूल की इमारतों की हालत का जायजा लिया. दौरे के बाद प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर सामने आई समस्याओं की जानकारी भी दी.
CJP के मुताबिक स्कूलों में सबसे बड़ी चिंता शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कामों में तैनाती है. पार्टी ने खास तौर पर Special Intensive Revision (SIR) जैसे कामों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने का मुद्दा उठाया. प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि कुछ स्कूलों में ऐसी ड्यूटी के चलते नियमित कक्षाएं चलाने के लिए बहुत कम शिक्षक बचे हैं.
आशुतोष रांका ने प्रेस क्लब ऑफ बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि शिक्षकों को लगातार दूसरे प्रशासनिक कामों में लगाने का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है.
उन्होंने कहा, “Teachers are for teaching, not for removing voters.”
रांका के मुताबिक पूरे शैक्षणिक वर्ष को देखें तो अलग-अलग गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों में शिक्षकों का करीब पांच महीने तक का समय प्रभावित हो रहा है. उनका कहना है कि प्रशासनिक और चुनाव से जुड़े कामों के लिए सरकार तथा चुनाव आयोग को दूसरे विकल्प तलाशने चाहिए, ताकि शिक्षकों को बार-बार कक्षाओं से बाहर न करना पड़े.
स्कूलों के दौरे के दौरान CJP ने सिर्फ शिक्षकों की कमी ही नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई सवाल भी उठाए. कुछ जगहों पर शौचालयों की सफाई और रखरखाव को लेकर समस्याएं सामने आईं. स्कूल की इमारतों और दूसरी सुविधाओं में भी मरम्मत की जरूरत बताई गई.
पार्टी का कहना है कि नए मॉडल स्कूल बनाना अच्छी पहल है, लेकिन मौजूदा सरकारी स्कूलों की रोजमर्रा की समस्याओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
कर्नाटक सरकार की Karnataka Public Schools पहल के तहत 2,000 से ज्यादा स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है. CJP ने इस पहल का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है, लेकिन अभी जिन स्कूलों में शिक्षक, साफ शौचालय और समय पर मरम्मत जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं, उन पर भी तुरंत ध्यान देना होगा.
बेंगलुरु के चार स्कूलों का यह दौरा कर्नाटक टीम के School Thik Karo अभियान का हिस्सा था. पार्टी के अनुसार इस अभियान के तहत राज्य के करीब 200 सरकारी स्कूलों का दौरा किया जा चुका है.
CJP का कहना है कि कई स्कूलों में सुविधाएं अच्छी मिलीं, लेकिन शिक्षकों की तैनाती, स्वच्छता और रखरखाव से जुड़ी समस्याएं अलग-अलग जगहों पर बार-बार सामने आईं. यानी मामला सिर्फ किसी एक स्कूल तक सीमित नहीं है.
CJP ने कर्नाटक के लोगों से भी अपील की है कि वे अपने आसपास के सरकारी स्कूलों का जायजा लें. पार्टी का कहना है कि इसके लिए किसी खास विशेषज्ञता की जरूरत नहीं है. लोग स्कूलों में जाकर यह देख सकते हैं कि कक्षाओं की हालत कैसी है, शौचालय साफ हैं या नहीं, बुनियादी सुविधाओं का रखरखाव हो रहा है या नहीं और बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक मौजूद हैं या नहीं है.
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-भारत एक्सप्रेस
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