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डॉलर की बादशाहत होगी खत्म! जानिए क्या है BRICS करेंसी और भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

BRICS करेंसी को लेकर फैलाई जा रही खबरें महज अफवाह हैं. भारत ने साफ किया है कि वह रुपये को मजबूत करने और स्थानीय मुद्रा में व्यापार पर ध्यान देगा, किसी नई करेंसी पर नहीं.

Is BRICS Currency Replacing US Dollar Impact On Rupee India Economy Bharat Express

क्या खत्म हो रही है डॉलर की 'बादशाहत'? (AI IMAGE)

इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इन दिनों BRICS Currency को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. चर्चा है कि क्या ब्रिक्स देश अमेरिकी डॉलर की बादशाहत खत्म करने के लिए कोई नई करेंसी ला रहे हैं? तो इसका सीधा और साफ जवाब है- नहीं!

फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक ब्रिक्स करेंसी नहीं आई है, जिसे आप बाजार में खरीद-बेच सकें या रुपये-डॉलर में बदल सकें.

क्या खत्म हो रही है डॉलर की ‘बादशाहत’?

ब्रिक्स सम्मेलनों के दौरान डॉलर पर निर्भरता कम करने और आपस में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर सहमति जरूर बनी है. लेकिन स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने और एक नई साझा ‘ब्लॉक करेंसी’ लॉन्च करने में बड़ा अंतर है.

क्रूड ऑयल, टेक्नोलॉजी इंपोर्ट और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए आज भी अमेरिकी डॉलर की भूमिका सबसे अहम बनी हुई है.

नहीं चाहिए BRICS करेंसी: भारत

भारत सरकार ने ब्रिक्स करेंसी के विचार को लेकर अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट रखा है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ किया था कि भारत किसी अलग ब्रिक्स करेंसी योजना के पक्ष में नहीं है.

साझा करेंसी के लिए सभी सदस्य देशों को महंगाई दर, ब्याज दरों और वित्तीय नीतियों पर एक राय होना पड़ता है, जो ब्रिक्स के अलग-अलग आर्थिक ढांचे के कारण फिलहाल संभव नहीं है. भारत अपनी मौद्रिक संप्रभुता (Monetary Sovereignty) और रुपये की आजादी को बनाए रखते हुए केवल आसान पेमेंट सिस्टम और स्थानीय व्यापार का समर्थन करता है.

वायरल ‘BRICS बैंकनोट’ का सच

सोशल मीडिया पर फैल रही ब्रिक्स करेंसी की चमचमाती नोटों की तस्वीरें कोई असली करेंसी नहीं हैं. फैक्ट-चेक के अनुसार, सम्मेलनों के दौरान दिखाई गई नोट केवल एक सांकेतिक गिफ्ट थी. इसे किसी भी देश के केंद्रीय बैंक की मंजूरी नहीं मिली है, इसलिए इसका कोई वास्तविक कानूनी या बाजार मूल्य नहीं है.

भारतीय रुपये और अर्थव्यवस्था के लिए क्या हैं मायने?

भारत के लिए किसी सामूहिक करेंसी से जुड़ने के बजाय रुपये का अंतर्राष्ट्रीयकरण करना ज्यादा सुरक्षित रास्ता है.

  • रुपये पर नियंत्रण: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास देश की मौद्रिक नीतियों का पूरा नियंत्रण रहेगा.
  • व्यापार में सहूलियत: स्थानीय मुद्रा में व्यापार से भारतीय कारोबारियों को करेंसी कन्वर्जन के झंझट और नुकसान से राहत मिलेगी.
  • संतुलित कूटनीति: भारत ब्रिक्स में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भी मजबूत आर्थिक संबंध बनाए रख सकेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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