CM Joseph Vijay Thalapathy Decision: तमिलनाडु की राजनीति में शराब बंदी और TASMAC (तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन) की दुकानों का मुद्दा हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है. लेकिन अब राज्य के मुख्यमंत्री एस. जोसेफ विजय थलापति ने एक ऐसा सख्त और ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसने सियासी समीकरणों में एक नई बहस छेड़ दी है. जनहित और सामाजिक सुरक्षा का हवाला देते हुए विजय सरकार ने अगले दो हफ्तों के भीतर 717 शराब की दुकानों को बंद करने का कड़ा आदेश जारी किया है.
धार्मिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों के पास से शराब की दुकानें हटाने के इस कड़े कदम को देखकर राजनीतिक गलियारों में यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि क्या BJP की लाइन पर विजय सरकार आगे बढ़ रही है?
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी (BJP) तमिलनाडु सहित पूरे देश में धार्मिक स्थलों, विशेषकर मंदिरों के आसपास शराब और मांस की बिक्री का लंबे समय से कड़ा विरोध करती रही है. सांस्कृतिक और धार्मिक पवित्रता को बनाए रखना BJP के कोर राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा रहा है. पूर्ववर्ती सरकारों पर अक्सर आरोप लगते रहे हैं कि राजस्व के लालच में मंदिरों और स्कूलों के पास शराब बिकने दी जा रही है.
अब मुख्यमंत्री जोसेफ विजय का यह फैसला सीधे तौर पर उसी वैचारिक लाइन से मेल खाता दिख रहा है, जहां उन्होंने बिना किसी राजनीतिक नफा-नुकसान की परवाह किए मंदिर, मस्जिद, चर्च और स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर दी है.
मुख्यमंत्री विजय ने पदभार संभालते ही अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि वे उन शराब दुकानों की पहचान करें जो जन-सुविधा और आस्था के केंद्रों के बेहद करीब हैं. राज्य सरकार द्वारा कराए गए इस सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए. TASMAC के तहत फिलहाल राज्य में कुल 4,765 शराब की खुदरा दुकानें संचालित की जा रही हैं. सर्वे में पहचान की गई कि इनमें से 717 दुकानें निर्धारित 500 मीटर की सीमा के भीतर चल रही हैं.
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सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मुनाफे से ऊपर आम जनता का हित है. अगले दो सप्ताह के भीतर इन सभी 717 चिन्हित दुकानों को चरणबद्ध तरीके से हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा. स्कूल-कॉलेजों के पास शराब की दुकानों के कारण छात्रों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव और धार्मिक स्थलों व बस स्टैंड्स के आसपास असामाजिक तत्वों के जमावड़े को लेकर लंबे समय से महिलाओं और आम जनता की शिकायतें सामने आ रही थीं.
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मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के इस फैसले को राज्य में सामाजिक सुधार और सार्वजनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बेहद अहम कदम माना जा रहा है. भले ही राजनीतिक पंडित इस फैसले को ‘BJP की लाइन’ से जोड़कर देख रहे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर यह कदम विजय की छवि को एक ऐसे दृढ़ प्रशासक के रूप में स्थापित कर रहा है, जो कड़े और सामाजिक सरोकार वाले फैसले लेने से पीछे नहीं हटता.
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