देश

कांग्रेस के सिपहसालार पर CRPF का आरोप- सिक्‍योरटी प्रोटोकॉल फॉलो नहीं करते राहुल गांधी, बिन बताए 9 महीने में 6 बार गए विदेश

Rahul Gandhi Security: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. CRPF का कहना है कि राहुल गांधी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे, जिससे उनकी Z+ कैटेगरी की सुरक्षा कमजोर हो सकती है. इस मुद्दे पर CRPF ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखा है, जिसमें बताया गया है कि पिछले नौ महीनों में राहुल गांधी बिना पूर्व सूचना दिए छह बार विदेश यात्रा पर गए.

ये यात्राएं इटली, वियतनाम, दुबई, कतर, लंदन और मलेशिया तक रही हैं. CRPF ने राहुल गांधी को भी अलग से पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि ऐसी लापरवाही से उन्हें खतरे का सामना करना पड़ सकता है. यह विवाद तब सामने आया जब गृह मंत्रालय की ‘येलो बुक’ प्रोटोकॉल की अनदेखी की बात उठी, जो वीवीआईपी सुरक्षा के लिए मानक दिशानिर्देश है.

Yellow Book Protocol: क्या है यह और क्यों जरूरी?

‘येलो बुक’ गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण दिशानिर्देश पुस्तिका है, जो राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को छोड़कर सभी वीवीआईपी की सुरक्षा मानकों को परिभाषित करती है. इसमें विभिन्न खतरे के स्तर के आधार पर सुरक्षा श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जैसे Z+, Z, Y और X. Z+ सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा है, जिसमें कमांडो, एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइजन (ASL) और अन्य एजेंसियों का समन्वय शामिल होता है. प्रोटोकॉल के अनुसार, सुरक्षित व्यक्ति को अपनी हर गतिविधि, यात्रा और विदेशी दौरों की पूर्व सूचना सुरक्षा एजेंसियों को देनी अनिवार्य है. इससे जोखिम मूल्यांकन के आधार पर पर्याप्त इंतजाम किए जा सकते हैं.

फैक्ट 1: येलो बुक में खतरे का आकलन चार कारकों पर आधारित होता है – गतिविधियों की प्रकृति, स्थान, संभावित लाभ और हमलावरों की क्षमता. उदाहरण के लिए, Z+ श्रेणी में 50 से अधिक कमांडो तैनात होते हैं, जो 24×7 निगरानी सुनिश्चित करते हैं.

फैक्ट 2: यह प्रोटोकॉल 2000 के दशक में विकसित हुआ, जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्याओं के बाद वीवीआईपी सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत पड़ी. गृह मंत्रालय के अनुसार, येलो बुक का उल्लंघन सुरक्षा चूक का कारण बन सकता है, जैसा कि 2013 में एक वीवीआईपी घटना में देखा गया था.

राहुल गांधी को Z+ सुरक्षा 2019 में बहाल की गई थी, जब उन्हें SPG (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) से हटाकर CRPF को सौंपा गया. SPG केवल प्रधानमंत्री और उनके तत्काल परिवार के लिए आरक्षित है. येलो बुक के नियमों का पालन न करने से न केवल व्यक्तिगत खतरा बढ़ता है, बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठते हैं. CRPF ने पत्र में जोर देकर कहा है कि पहले भी इस मुद्दे को उठाया गया था, लेकिन सुधार नहीं हुआ.

विदेश यात्राओं का विवरण: बिना सूचना के छह दौरे

CRPF के पत्र के अनुसार, राहुल गांधी ने पिछले नौ महीनों (जनवरी से सितंबर 2025 तक) में छह अवसरों पर बिना पूर्व सूचना दिए विदेश यात्रा की. इनमें शामिल हैं:

इटली (फरवरी 2025): परिवार से जुड़ी यात्रा, जहां ASL टीम को अंतिम क्षण में सूचित किया गया.

वियतनाम (मार्च 2025): राजनीतिक चर्चाओं के लिए, लेकिन सुरक्षा मूल्यांकन के बिना.

दुबई (अप्रैल 2025): व्यावसायिक मुलाकातें, जो येलो बुक के तहत जोखिम भरी मानी जाती हैं.

कतर (मई 2025): कूटनीतिक संपर्क, लेकिन प्रोटोकॉल उल्लंघन.

लंदन (जुलाई 2025): विपक्षी नेताओं से बैठक, जहां स्थानीय खतरे का आकलन नहीं हुआ.

मलेशिया (अगस्त 2025): व्यक्तिगत यात्रा, जिससे CRPF की टीम को असुविधा हुई.

फैक्ट 3: येलो बुक के अनुसार, विदेश यात्रा के लिए कम से कम 72 घंटे पहले सूचना देनी होती है, जिसमें यात्रा का उद्देश्य, मार्ग और सहयात्रियों का विवरण शामिल होता है. उल्लंघन पर सुरक्षा एजेंसी रिपोर्ट दर्ज कर सकती है.

फैक्ट 4: भारत में Z+ सुरक्षा वाले कुल 12-15 नेता हैं, जिनमें सोनिया गांधी, ममता बनर्जी और अन्य शामिल हैं. ऐसी श्रेणी में सालाना 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होता है. इन यात्राओं से CRPF को तत्काल इंतजाम करने पड़े, जो संसाधनों पर बोझ डालते हैं.

कांग्रेस का पक्ष और राजनीतिक निहितार्थ

कांग्रेस पार्टी ने अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालांकि, पार्टी के करीबी सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी की यात्राएं पारदर्शी हैं और सुरक्षा टीम को सूचित किया जाता है. विपक्ष इसे राजनीतिक साजिश बता रहा है, जबकि सत्ताधारी दल इसे सुरक्षा की गंभीरता का मामला मान रहा है.

फैक्ट 5: येलो बुक का पहला संस्करण 1998 में जारी हुआ, और 2020 में अपडेट किया गया, जिसमें डिजिटल निगरानी और साइबर खतरे शामिल किए गए. फैक्ट 6: ऐतिहासिक रूप से, कांग्रेस नेताओं को उच्च सुरक्षा मिली है – इंदिरा गांधी को 1984 तक SPG, और राजीव गांधी की हत्या के बाद प्रोटोकॉल सख्त हुए. वर्तमान में, CRPF के पास 3 लाख से अधिक जवान हैं, जो VVIP सुरक्षा का प्रमुख हिस्सा हैं.

यह विवाद न केवल राहुल गांधी की व्यक्तिगत सुरक्षा पर सवाल उठाता है, बल्कि पूरे राजनीतिक तंत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल की पालना पर बहस छेड़ता है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी चूकें आतंकी समूहों को मौका दे सकती हैं. गृह मंत्रालय अब इसकी जांच कर सकता है, जो आने वाले दिनों में राजनीतिक हलचल बढ़ा सकता है.

ये भी पढ़ें: भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़कर 251.5 गीगावट हुई, स्वदेशी सोलर वैल्यू चैन बढ़ाने पर फोकस कर रही मोदी सरकार

Also Follow Bharat Express on Facebook

-भारत एक्सप्रेस 

निहारिका गुप्ता

Recent Posts

भारत की झोली में सातवां गोल्ड, चीन को हराकर महिला तीरंदाजों ने रचा इतिहास

Asian Games 2026 में भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने चीन को 238-234 से हराकर…

3 minutes ago

क्या पेट में अल्सर या हेपेटाइटिस बन सकता है कैंसर का कारण? जानिए 5 खतरनाक इंफेक्शन की पूरी सच्चाई

Health News: दुनियाभर में 2024 में 23 लाख कैंसर केस 5 गंभीर इंफेक्शन से जुड़े…

17 minutes ago

526 किलो ड्रग्स, गुजरात में 5 पाकिस्तानी गिरफ्तार… अरब सागर में कैसे पकड़ी गई 3000 करोड़ की खेप?

अरब सागर में भारतीय तटरक्षक बल और गुजरात ATS ने 526 किलो ड्रग्स जब्त की.…

23 minutes ago

अगले 8 घंटे और भारी..16 राज्यों में दिखेगा इन्द्र का रौद्र रूप, मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाओं का अलर्ट

Weather Update Today: 30 सितंबर को दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में…

38 minutes ago

‘हनुमान अंश’ की को-प्रोड्यूसर का नेक कदम: वायरल सिंगर सुनील लोधी की आंखों का कराएंगी इलाज

बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही फिल्म 'हनुमान अंश' से जुड़ी एक दिल को छू…

43 minutes ago

Delhi Pollution Rules: दिल्ली में सर्दियों की जहरीली हवा रोकने की तैयारी, 1 नवंबर से इन वाहनों का कटेगा चालान

Delhi News: दिल्ली में 1 नवंबर से गैर-BS6 बाहरी गाड़ियों की नो एंट्री लागू होगी.…

50 minutes ago