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Naxalism का The End: 182 से घटकर 11 जिलों तक सिमट गया ‘रेड कॉरिडोर’, 75 घंटे में 303 नक्सलियों का सरेंडर

Naxalism Decline In India: वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) के खिलाफ मोदी सरकार की मुहिम ने ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2013 में 182 जिलों में फैले नक्सलवाद का दायरा अक्टूबर 2025 तक घटकर मात्र 11 रह गया है. यह कमी विकास और सुरक्षा अभियानों का परिणाम है, जहां हिंसा के बजाय प्रगति पर जोर दिया जा रहा है. 31 मार्च 2026 तक ‘नक्सल मुक्त भारत’ का लक्ष्य अब करीब नजर आ रहा है, जो ‘लाल आतंक’ को इतिहास के पन्नों में समेट देगा.

सामूहिक आत्मसमर्पण, सैकड़ों नक्सली मुख्यधारा में लौटे

आधिकारिक दावा है कि 75 घंटों में 303 नक्सलियों ने हथियार डाले हैं, यह कामयाबी सरकारी पुनर्वास योजनाओं की सफलता का प्रतीक है. इसके अलावा यह खबर भी आई थी कि छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में तीन दिनों में 405 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण (Naxalite Surrenders) किया, जिनमें 208 ने एक ही दिन में हथियार सौंपे. इनमें शीर्ष कमांडर रूपेश (सतीश उर्फ असन्ना) जैसे बड़े नाम शामिल हैं, जिन पर 6 करोड़ का इनाम था.

महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में भी 61 नक्सली लौटे, जिनमें पोलितब्यूरो सदस्य भूपति प्रमुख थे. गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ‘नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक दिन’ बताया, जबकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘हिंसा से आशा की ओर बदलाव’ का जिक्र किया.

सरकारी प्रयासों से प्रगति, 2100+ नक्सलियों का आत्मसमर्पण

जनवरी 2024 से छत्तीसगढ़ में 2100 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, 1785 गिरफ्तार हुए और 477 मारे गए. ‘नियद नेल्ला नार’ और ‘नक्सल आत्मसमर्पण नीति 2025’ के तहत 5 लाख तक की सहायता मिल रही है. अबूझमाड़ और उत्तरी बस्तर जैसे क्षेत्र नक्सल-मुक्त घोषित हो चुके हैं. गृह मंत्रालय के अनुसार, सबसे प्रभावित जिले अब सिर्फ बस्तर के बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर रह गए हैं. ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट जैसी कार्रवाइयों में 31 नक्सली ढेर हुए. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि नक्सलवाद अब कमजोर पड़ चुका है, और विकास परियोजनाएं जैसे गढ़चिरोली में 3 लाख करोड़ का निवेश रोजगार सृजित कर रही हैं.

नक्सल प्रभावित गांवों में बिजली, सड़क और शिक्षा की पहुंच

नक्सल प्रभावित गांवों में बिजली, सड़क और शिक्षा पहुंच रही है. गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों के लिए स्पष्ट कहा था, “जो आत्मसमर्पण करेंगे, उनका स्वागत होगा; बाकी का एनकाउंटर होगा.” यह बदलाव न केवल सुरक्षा, बल्कि समृद्धि की गारंटी है.

यह भी पढ़िए: खात्‍मे की ओर नक्सलवाद: बस्तर में अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण हुआ, 405 माओवादियों ने डाले हथियार

Bharat Express Desk

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