Devar Bhabhi Porn Ban: डिजिटल दुनिया और ऑनलाइन कंटेंट को लेकर एक बहुत बड़ा और कड़ा फैसला सामने आया है. ब्रिटेन सरकार ने एडल्ट साइट्स और पोर्नोग्राफी पर नकेल कसते हुए एक नया और सख्त कानून लागू करने का ऐलान किया है. इसके तहत पोर्न वीडियो में सेक्स के दौरान ‘चोकिंग’ (यानी गला घोंटने या दम घुटने जैसे हिंसक सीन) और देवर-भाभी, भाई-बहन, मां-बेटे जैसे करीबी पारिवारिक रिश्तों के बीच फिल्माए गए सेक्स वीडियो देखने, डाउनलोड करने या शेयर करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. इस नियम को तोड़ने पर सीधे तौर पर 5 साल तक की जेल की सजा हो सकती है.
ब्रिटेन सरकार और वहां के समाज सुधारकों का मानना है कि इस तरह के हिंसक और आपत्तिजनक कंटेंट से खासकर युवाओं और बच्चों की मानसिकता पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. युवाओं को यह लगने लगता है कि असल जिंदगी में सेक्स के दौरान हिंसा करना या गला घोटना एक सामान्य बात है, जबकि हकीकत में ऐसा व्यवहार किसी की जान तक के लिए खतरा (UK bans devar bhabhi and choking porn) बन सकता है.
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जब ब्रिटेन जैसे देश ने पोर्नोग्राफी में हिंसा और पारिवारिक मर्यादाओं को तार-तार करने वाले कंटेंट पर इतना कड़ा रुख अपनाया है, तो भारत जैसे देश में इस पर गंभीर बहस छिड़ना लाजिमी है. भारत में परिवार, रिश्ते और सामाजिक मर्यादाओं को बहुत ऊंचे पायदान पर रखा जाता है. जब इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए देवर-भाभी या अन्य करीबी रिश्तों से जुड़े इस तरह के अश्लील और विकृत वीडियो परोसे जाते हैं, तो समाज की युवा पीढ़ी की सोच पर इसका गहरा नकारात्मक असर पड़ता है.
भारत में ऑनलाइन अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री को रोकने के लिए पहले से ही कुछ कानूनी प्रावधान मौजूद हैं.
हाल के वर्षों में भारत सरकार ने भी अश्लील कंटेंट परोसने वाले दर्जनों ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स और ऐप्स को ब्लॉक किया है. सरकार की सख्ती के चलते पिछले दो वर्षों में 50 से अधिक आपत्तिजनक ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है.
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भले ही भारत में आईटी एक्ट के तहत अश्लील कंटेंट को बैन करने के नियम हैं, लेकिन ब्रिटेन की तरह ‘चोकिंग’ या देवर-भाभी जैसे विशिष्ट पारिवारिक रिश्तों को आधार बनाकर पोर्नोग्राफी पर रोक लगाने वाला कोई अलग और स्पष्ट कानून फिलहाल नहीं है.
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में इंटरनेट की पहुंच बच्चों तक बहुत आसान हो चुकी है. ऐसे में यदि ब्रिटेन की तरह भारत भी ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी और जवाबदेही को और अधिक कड़ा नहीं करता, तो आने वाले समय में समाज के ताने-बाने को बचाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है. अब देखना यह होगा कि क्या देश में नीति निर्माता इस दिशा में कोई सख्त कदम उठाने पर विचार करते हैं या नहीं.
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