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पार्षद से प्रथम नागरिक तक: पति और बच्चे को खोया, पढ़ें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सफर

President Droupadi Murmu Biography: देश की लोकतांत्रिक यात्रा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का एक ऐतिहासिक अध्याय तब जुड़ा, जब ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचीं. संघर्ष, कठिन परिस्थितियों और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने न केवल भारत की दूसरी महिला राष्ट्रपति बनने का गौरव हासिल किया, बल्कि देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में भी इतिहास रचा (First Tribal Woman President of India).

20 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपना जन्मदिन मना रही हैं. इस खास मौके पर आइए जानते हैं उनके जीवन की उन चुनौतियों और उपलब्धियों के बारे में, जिन्होंने उन्हें साधारण परिवार की बेटी से देश की प्रथम नागरिक बनने तक का गौरवशाली सफर तय करने में मदद की.

द्रौपदी मुर्मू का जीवन परिचय

द्रौपदी मुर्मू भारतीय राजनीति की उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने अपने संघर्ष, मेहनत और समर्पण के बल पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया (Droupadi Murmu Biography). वह भारत की दूसरी महिला राष्ट्रपति और पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं. लंबे समय तक सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. राष्ट्रपति बनने से पहले वह झारखंड की राज्यपाल भी रह चुकी हैं और अपने सरल स्वभाव तथा जनसेवा के लिए जानी जाती हैं.

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में एक साधारण संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था. उनके पिता बिरंची नारायण टुडू अपने गांव और समुदाय के सम्मानित व्यक्ति थे तथा स्थानीय परंपराओं के अनुसार नेतृत्व की भूमिका निभाते थे. सीमित संसाधनों के बावजूद द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया और कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए आगे बढ़ती रहीं. ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने न केवल राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण भी बनीं.

राष्ट्रपति कितनी पढ़ी हैं?

द्रौपदी मुर्मू ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई अपने गृह जिले में पूरी की (President Droupadi Murmu education). इसके बाद उन्होंने भुवनेश्वर स्थित रामादेवी महिला महाविद्यालय से ग्रेजुएशन की शिक्षा प्राप्त की. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षण क्षेत्र में कदम रखा और बतौर शिक्षिका कार्य भी किया.

पति और बच्चे को खोया

द्रौपदी मुर्मू का जीवन कई कठिन चुनौतियों से भरा रहा. उनका विवाह श्याम चरण मुर्मू से हुआ था और उनके तीन बच्चे थे (president draupadi murmu family). समय के साथ उन्होंने अपने दोनों बेटों और पति को खो दिया, जो उनके लिए बेहद दुखद अनुभव था. इन व्यक्तिगत आघातों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और जनसेवा के उद्देश्य से सार्वजनिक जीवन तथा राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई.


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पार्षद से राष्ट्रपति तक का सफर

द्रौपदी मुर्मू ने राजनीति में अपनी शुरुआत भारतीय जनता पार्टी से की (Droupadi Murmu Political Career). वर्ष 1997 में उन्होंने रायरंगपुर नगर पंचायत के पार्षद चुनाव में जीत हासिल की. इसके बाद पार्टी ने उन्हें अनुसूचित जनजाति मोर्चा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी.

साल 2000 से 2002 के बीच वे ओदिशा सरकार में वाणिज्य एवं परिवहन विभाग की स्वतंत्र प्रभार मंत्री रहीं. इसके बाद 2002 से 2004 तक उन्होंने मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास विभाग में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया. वे रायरंगपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी चुनी गईं. वर्ष 2015 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया. 2015 से 2021 तक इस पद पर रहते हुए उन्होंने राज्य की पहली महिला राज्यपाल बनने का गौरव प्राप्त किया. और अब लगभग 4 साल से लगातार देश के 15वीं राष्ट्रपति के रूप पर कार्यरत हैं.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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