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कलेक्टर साहब सुनिए! गरियाबंद में 3 साल से पेट में पाइप लेकर जी रहा मासूम, पर साहब कहते हैं ‘बजट नहीं है’

गरियाबंद के मैनपुर ब्लॉक से सिस्टम को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है. यहाँ एक विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार) का 3 साल का मासूम जन्म से मलद्वार न होने की बीमारी से जूझ रहा है. विडंबना देखिए कि जिसे ‘राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र’ कहा जाता है, उसे अधिकारियों ने यह कहकर लौटा दिया कि “समाज का बजट खत्म हो गया है.”

गरियाबंद के बोइरगांव में एक कमार मासूम एनोरेक्टल मालफरमेशन से पीड़ित है. रायपुर के DKS अस्पताल में शुरुआती सर्जरी के बाद पैसों के अभाव में इलाज रुक गया है. प्रशासन ने ‘बजट खत्म’ होने का हवाला देकर मदद से हाथ खींच लिए हैं. अब बेबस परिवार साय सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है.

इलाज की अधूरी आस

परिजनों ने बताया कि मासूम को रायपुर के DKS अस्पताल रेफर किया गया था. वहां ऑपरेशन कर पेट से पाइप तो लगा दी गई, लेकिन पूर्ण उपचार नहीं हो सका. दोबारा अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने आगे के इलाज के लिए पैसों की मांग की. गरीबी की मार झेल रहे इस परिवार के पास अस्पताल के खर्च जुटाने के साधन नहीं हैं, जिसके कारण बच्चा पिछले 3 साल से असहनीय दर्द में जीने को मजबूर है.

प्रशासन की बेरुखी

मदद की उम्मीद में जब मितानिन और परिजन परियोजना कार्यालय पहुंचे, तो वहां का अनुभव और भी कड़वा रहा. मितानिन वीरोबाई के अनुसार, जब उन्होंने AC (असिस्टेंट कमिश्नर) साहब से बच्चे की स्थिति साझा की, तो उन्होंने यह कहकर मदद से इनकार कर दिया कि “कमार समाज का बजट अब खत्म हो गया है.” परिजनों को मार्गदर्शन देने के बजाय अन्य समाजों का उदाहरण देकर वापस कलेक्टर से मिलने की सलाह देकर पल्ला झाड़ लिया गया.

इलाज के लिए दर-दर भटक रहा परिवार

परियोजना कार्यालय से खाली हाथ लौटने के बाद अब पीड़ित परिवार पूरी तरह टूट चुका है. राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले इस परिवार के पास अब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन से गुहार लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.

बाइट (वीरोबाई, मितानिन)

“3 साल का बच्चा है, रायपुर DKS अस्पताल में ऑपरेशन कर पेट से पाइप निकाल दी गई. दोबारा ले गए तो पैसा मांगा गया, हम गरीब कहां से लाएंगे? परियोजना ऑफिस में AC सर ने कहा कि कमार समाज का बजट खत्म हो गया है, अब पैसा नहीं है. उन्होंने कलेक्टर से बात करने को कहा, हम निराश होकर लौट आए.”

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-भारत एक्सप्रेस 

Shubhra Rai

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