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अंतरिक्ष में टिमटिमाते तारों से सजा Google, जानिये इस डूडल के पीछे का क्या है राज?

Google Change Doodle: आज Google खोलते ही दिलचस्प नजारा देखने को मिल रहा है. सर्च इंजन गैलेक्सी और सितारों से सजा दिखाई दे रहा है. ऐसा लग रहा है कि Google खुद अंतरिक्ष में चला गया हो. आप सोच रहे होंगे कि आखिर गूगल ने ऐसा क्यों किया, तो बता दें कि इसके पीछे एक खास वजह है.

Google ने यह डूडल विश्व अंतरिक्ष सप्ताह 2026 को लेकर तैयार किया है. हर साल पूरी दुनिया में 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक विश्व अंतरिक्ष सप्ताह मनाया जाता है. जिसका मकसद लोगों को अंतरिक्ष और उससे जुड़ी तकनीकों व मानव जीवन में अंतरिक्ष से जुड़े रिसर्चों के महत्व को बढ़ावा देना होता है.

साल 2026 के विश्व अंतरिक्ष सप्ताह की थीम रॉकेट रेवोल्यूशन पर आधारित है. जिसका फोकस रॉकेट लॉन्चिंग के क्षेत्र में लगातार हो रहे तेज बदलावों पर है. इसमें खास तौर पर अंतरिक्ष में दोबारा इस्तेमाल किये जा सकने वाले रॉकेट, लॉन्चिंग में घट रही लागत और प्राइवेट कंपनियों की अंतरिक्ष में बढ़ रही भागीदारी शामिल किया गया है.

अंतरिक्ष में टिमटिमाते तारों से सजा Google

क्यों मनाया जाता है विश्व अंतरिक्ष सप्ताह?

साल 1999 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व अंतरिक्ष सप्ताह मनाने की घोषणा की. इसकी टाइमलाइन 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर रखी गई थी. यह टाइमलाइन चुनने के पीछे संयुक्त राष्ट्र ने अंतरिक्ष इतिहास की दो घटनाओं को आधार बनाया.

दरअसल 4 अक्टूबर 1957 को दुनिया का पहला मानव निर्मित उपग्रह स्पुतनिक-1 को सोवियत संघ ने अंतरिक्ष में भेजकर इतिहास रच दिया था. इसे दुनिया में अंतरिक्ष युग की शुरुआत के तौर पर देखा जाता है.

10 अक्टूबर को लागू हुई थी स्पेस ट्रीटी

वहीं 10 अक्टूबर 1967 को आउटर स्पेस ट्रीटी लागू की गई थी. इसमें अंतरिक्ष का शांतिपूर्ण इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय नियमों को लागू किया गया था. ताकि अंतरिक्ष में मानव मिशनों का इस्तेमाल मानवता की भलाई के लिए किया जा सके.

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विश्व अंतरिक्ष सप्ताह का भारत में भी जबरदस्त क्रेज दिखता है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) सहित कई विश्वविद्यालय इस दिन स्पेस से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रम करते हैं.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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