E Samudra Portal: केंद्र सरकार ने शनिवार को समुद्री क्षेत्र में डिजिटल बदलाव को गति देने और नाविकों के कल्याण को मजबूत बनाने के उद्देश्य से ‘ई-समुद्र’ नामक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जो नाविकों, शिपिंग कंपनियों, बंदरगाहों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराएगा.
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस प्लेटफॉर्म का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत की समुद्री विकास रणनीति के केंद्र में नाविक रहेंगे और सरकार उनकी सुरक्षा, सम्मान और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
उन्होंने कहा, ‘हर भारतीय नाविक सुरक्षित, सम्मानित और संरक्षित होना चाहिए. यही हमारी प्राथमिकता है.’ सोनोवाल ने बताया कि भारत आज दुनिया में नाविकों की आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है और उन्हें विश्वास है कि आने वाले समय में भारत इस क्षेत्र में दुनिया में पहला स्थान हासिल कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत वर्तमान में विश्व का अग्रणी शिप रीसाइक्लिंग हब है और सरकार देश को दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल करने की दिशा में काम कर रही है. मंत्री ने कहा कि ई-समुद्र केवल एक तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह समुद्री प्रशासन को अधिक सरल, पारदर्शी और हितधारक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
पोत परिवहन मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने बताया कि ई-समुद्र समुद्री सेवाओं के लिए एक सिंगल डिजिटल विंडो के रूप में काम करेगा. इसके जरिए ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल भुगतान, रियल-टाइम ट्रैकिंग और डिजिटल प्रमाणपत्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी. उन्होंने कहा, “ई-समुद्र एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो, ऑनलाइन भुगतान, रियल-टाइम ट्रैकिंग और डिजिटल सर्टिफिकेट्स के साथ समुद्री सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल स्वरूप देगा.’
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में सक्रिय नाविकों की संख्या वर्ष 2013 में लगभग 1.03 लाख थी, जो बढ़कर 2025 में 3.23 लाख से अधिक हो गई है. नाविकों की इस तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए डिजिटल सेवाओं और कल्याणकारी व्यवस्थाओं को मजबूत करना आवश्यक हो गया है. महासागरीय प्रशासन के महानिदेशक श्याम जगन्नाथन ने कहा कि ई-समुद्र प्लेटफॉर्म समुद्री प्रशासन को पारंपरिक कार्यालय आधारित प्रणाली से निकालकर डिजिटल-फर्स्ट और फेसलेस गवर्नेंस की दिशा में ले जाएगा.
उन्होंने कहा कि इससे सेवाओं की डिलीवरी तेज होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और समुद्री क्षेत्र से जुड़े हितधारकों को अधिक सुविधा मिलेगी. मंत्रालय ने बताया कि हाल के भू-राजनीतिक तनावों के दौरान भारतीय समुद्री प्रशासन ने वैश्विक शिपिंग गतिविधियों पर लगातार नजर रखी. इस दौरान 16,000 से अधिक कॉल्स की निगरानी की गई और 40,000 से अधिक संचार गतिविधियों का प्रबंधन किया गया.
सरकार ने यह भी बताया कि विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, भारतीय नौसेना और अन्य एजेंसियों के सहयोग से संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे 4,000 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया. गौरतलब है कि ई-समुद्र और अन्य डिजिटल पहलें ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ और ‘मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047’ के तहत समुद्री क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने की सरकार की रणनीति का हिस्सा हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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