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वीआईपी कल्चर को ‘बाय-बाय’: अब बस और ट्रेन में नजर आएंगे गुजरात के राज्यपाल, छोड़ दी सुरक्षा और लग्जरी गाड़ियां!

आमतौर पर जब हम किसी ‘राज्यपाल’ या बड़े वीआईपी (VIP) के बारे में सोचते हैं, तो दिमाग में सबसे पहले गाड़ियों का लंबा काफिला, गूंजते सायरन और उड़ते हेलीकॉप्टर की तस्वीर आती है. लेकिन गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने इन तमाम सुख-सुविधाओं को किनारे रखकर एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा आज हर घर में हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और आर्थिक बचत के आह्वान से प्रभावित होकर राज्यपाल ने अपनी पूरी लाइफस्टाइल बदलने का फैसला किया है.

उनके इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद अब वो किसी आम आदमी की तरह बस और ट्रेन में सफर करते नजर आएंगे. आइए जानते हैं कि राजभवन से निकलकर आम सड़कों तक आने का ये सफर कैसा होने वाला है.

हेलीकॉप्टर को कहा ‘ना’, बस-ट्रेन को ‘हां’

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक वो किसी भी कार्यक्रम में जाने के लिए हेलीकॉप्टर या चार्टर्ड प्लेन का इस्तेमाल नहीं करेंगे.

इसकी जगह वह अब सरकारी बसों, ट्रेनों और सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) का सहारा लेंगे. उन्होंने कहा कि छोटा सा त्याग ही भारत को भविष्य में अधिक सुरक्षित और शक्तिशाली बनाएगा.

Z+ सुरक्षा का त्याग और सादगी पर जोर

सिर्फ सफर ही नहीं, राज्यपाल ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया है. उन्होंने खुद को दी गई ‘Z+ सुरक्षा’ को छोड़ने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही उन्होंने आदेश दिया है कि उनके कार्यालय के लिए कोई भी नई चमचमाती लग्जरी कार नहीं खरीदी जाएगी. मौजूदा संसाधनों में ही काम चलाने का यह फैसला सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ को कम करने की एक बड़ी कोशिश है.

अगली पीढ़ी के लिए ‘साइकिल और ई-व्हीकल’ का मंत्र

राज्यपाल का ये बदलाव सिर्फ खुद तक सीमित नहीं है. उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं से भी अपील की है कि वे हफ्ते में कम से कम एक दिन पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों के बजाय साइकिल, इलेक्ट्रिक वाहन या बस-मेट्रो का इस्तेमाल करें. उनका मानना है कि अगर युवा पीढ़ी अभी से पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के प्रति जागरूक होगी, तभी आत्मनिर्भरता का सपना सच होगा.

प्रशासनिक अधिकारियों को भी नसीहत

आचार्य देवव्रत ने प्रशासन के आला अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे अनावश्यक रूप से गाड़ियों का उपयोग बंद करें. उन्होंने ‘लोकल फॉर वोकल’ और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर देने को कहा है.

ये भी पढ़ें: पोखरण की 28वीं वर्षगांठ: पीएम मोदी बोले- ‘1998 में दुनिया ने देखी थी भारत की अटल इच्छाशक्ति’

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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