ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला. (फाइल फोटो)
Shubhanshu Shukla Space Mission: जब विंग कमांडर रिटायर्ड राकेश शर्मा अप्रैल 1984 में सोवियत अंतरिक्ष यान के जरिए अंतरिक्ष की यात्रा पर गए थे, तब ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का जन्म भी नहीं हुआ था. उनके जन्म से पहले ही राकेश शर्मा की यह उपलब्धि भारतीय जनमानस का हिस्सा बन चुकी थी — स्कूलों में सुनाई जाने वाली गर्व की एक कहानी.
अब, 41 साल बाद, शुभांशु शुक्ला ने वही ऐतिहासिक कदम दोहराया है और अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले भारत के दूसरे नागरिक बन गए हैं. इन दो यात्राओं के बीच का लंबा अंतराल बहुत कुछ कहता है — बदलती प्राथमिकताओं, अंतरराष्ट्रीय समीकरणों और स्वदेशी क्षमताओं के धीरे-धीरे विकसित होने की कहानी.
लेकिन अब हालात बदल गए हैं. जहां राकेश शर्मा को सोवियत मिशन का हिस्सा बनकर जाना पड़ा था क्योंकि भारत के पास तब अपना मानव अंतरिक्ष मिशन नहीं था, वहीं शुक्ला की उड़ान उस समय हो रही है जब भारत अपनी मानव अंतरिक्ष यात्रा की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा चुका है. भले ही शुक्ला का मिशन (Ax-4) अब भी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के तहत हुआ हो, लेकिन यह भारत के आत्मनिर्भर अंतरिक्ष अभियान के नए युग की शुरुआत का संकेत है.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अब तक कई अहम तकनीकों को विकसित कर लिया है जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं — जैसे कि क्रू एस्केप सिस्टम का परीक्षण और ऊंचाई पर आपातकालीन रद्दीकरण का सफल प्रदर्शन. इस साल के अंत तक गगनयान मिशन के तहत पहला बिना मानव वाला परीक्षण प्रस्तावित है, जिसके बाद कई और परीक्षण किए जाएंगे ताकि इंसानों को सुरक्षित भेजने की तैयारी पूरी हो सके.
अब हालात पहले जैसे नहीं हैं, जब भारत को मानव अंतरिक्ष यात्रा के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था. गगनयान मिशन पूरी तरह स्वदेशी है — यह मिशन 400 किलोमीटर की कक्षा तक यात्रियों को ले जाकर, सात दिनों तक उन्हें अंतरिक्ष में रखकर सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें कितने अंतरिक्ष यात्री भेजे जाएंगे और मिशन कितने दिन का होगा, इस पर अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा. इसके लिए भारत के शक्तिशाली रॉकेट LVM3 को संशोधित किया गया है, जिसने पहले ही अपनी विश्वसनीयता साबित कर दी है.
जहां राकेश शर्मा ने सोवियत संघ में और शुक्ला ने इस मिशन के लिए आंशिक रूप से अमेरिका में प्रशिक्षण लिया, वहीं अब भारत में बेंगलुरु स्थित स्वदेशी अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र स्थापित हो चुका है. भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों का चयन, प्रशिक्षण और प्रक्षेपण – सब भारत में ही होगा.
भविष्य की योजना सिर्फ लो-अर्थ ऑर्बिट तक सीमित नहीं है. अगले दो दशकों में भारत अंतरिक्ष में दीर्घकालिक मानव उपस्थिति, अपने अंतरिक्ष स्टेशन मॉड्यूल और चंद्रमा पर मानव मिशनों की ओर बढ़ने का इरादा रखता है.
हालांकि ये भविष्य की बातें हैं, लेकिन एक बात अब तय है — भारत के पास अब वह संस्थागत ढांचा, प्रमाणित तकनीकें और समर्पित निवेश मौजूद हैं, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि अगली बार अंतरिक्ष में कोई भारतीय भेजने के लिए हमें फिर से चार दशक इंतजार न करना पड़े.
ये भी पढ़ें: “मेरे कंधे पर मेरे साथ मेरा तिरंगा है”, अंतरिक्ष के सफर पर निकले शुभांशु शुक्ला ने भेजा संदेश, कही ये बातें
-भारत एक्सप्रेस
Aaj Ka Rashifal 3 October 2026: शनिवार को ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का 12 राशियों पर…
Aaj Ka Rashifal Mesh Rashi: मेष राशि वालों के लिए आज कार्यस्थल पर बदलाव और…
Aaj Ka Rashifal Vrish Rashi: वृष राशि वालों के लिए आज पुराने अटके कामों में…
Aaj Ka Rashifal Mithun Rashi: मिथुन राशि वालों के लिए आज रवि योग नए प्रयासों…
Aaj Ka Rashifal Kark Rashi: आज आपका मिलनसार और मददगार स्वभाव लोगों के बीच सम्मान…
Aaj Ka Rashifal Singh Rashi: सिंह राशि वालों के लिए आज कामकाज में आगे बढ़ने…