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गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति की ओर बढ़ता भारत, शास्त्री भवन और निर्माण भवन की छुट्टी, जानिए क्यों है Kartavya Bhavan खास?

दिल्ली में अब एक नया और शानदार सरकारी ऑफिस बनकर तैयार हो गया है. इस भवन का नाम है कर्तव्य भवन (Kartavya Bhavan). प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने इसका उद्घाटन किया और इसे गुलामी की सोच से आज़ादी की तरफ एक बड़ा कदम बताया.

कर्तव्य भवन की जरूरत क्यों ?

अब आप सोच रहे होंगे कि ये नया भवन क्यों बना? दरअसल शास्त्री भवन, निर्माण भवन और कृषि भवन जैसे ऑफिस, बहुत पुराने हो चुके हैं. यो 1950-70 के दशक में बनाए गए थे. इस इमारत का निर्माण किसी विशेष योजना के साथ नहीं किया गया था. अब ये भवन जर्जर हो गए हैं, जगह कम पड़ती है और रखरखाव में भी सरकार को ज्यादा खर्च उठाना पड़ता है. इसलिए सरकार ने सोचा कि क्यों ना एक नया, आधुनिक और टिकाऊ ऑफिस बनाया जाए. और यही से कर्तव्य भवन (Kartavya Bhavan) का निर्माण शुरू हुआ.

एक ही भवन में चलेंगे कई मंत्रालय

अब एक ही छत के नीचे कई मंत्रालय काम करेंगे. जैसे गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्राणीण विमकास मंत्रालय, MSME, पेट्रोलियम मंत्रालय कर्तव्य भवन में चलेंगे. सबसे बड़ी बात ये होगी कि एक-दूसरे मंत्रालय के बीच काम में तालमेल बढ़ेगा और समय की बचत भी होगी.

भवन में हाईटेक सुविधाएं

इस भवन को दिल्ली के जनपथ पर बनाया गया है. कर्तव्य भवन (Kartavya Bhavan) हाईटेक सुविधाओं से लैस है. जिसमें स्मार्ट एंट्री, CCTV से निगरानी, सोलर पैनल, बारिश का पानी जमा करने की व्यवस्था और कचरे का सही प्रबंधन है. इतना ही नहीं इस भवन के निर्माण में रिसाइकल की गई चीजों का इस्तेमाल भी हुआ है ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान ना पहुंचे.

पुराने भवनों का क्या होगा ?

अब सवाल उठता है कि आखिर पुराने भवनों का क्या होगा? बता दें, सरकार की योजना है कि भवन को धीरे-धीरे खाली किया जाएगा. नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को म्यूजियम में बदलने की तैयारी है. इस म्यूजियम का नाम ‘युगे युगीन’ रखा जाएगा.

इसे भी पढ़ें- Delhi: पीएम मोदी ने कर्तव्य भवन का किया उद्घाटन, कई अहम मंत्रालय बिल्डिंग में होंगे शिफ्ट

पुराने भवन गुलामी की मानसिकता के प्रतीक- पीएम मोदी

उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पुराने भवन गुलामी की मानसिकता के प्रतीक थे. इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि ‘इस भवन का निर्माण बिना किसी योजना के किया गया था. लेकिन कर्तव्य भवन आधुनिक भारत की सोच, आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी का प्रतीक है.’

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-भारत एक्सप्रेस

Pankaj kumar Pandey

मैं पंकज कुमार पाण्डेय हूं और मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण से आता हूं, जो सत्याग्रह की धरती है. मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंपारण में ही हुई है. इसके बाद मैंने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की. अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा हूं. इस दौरान रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचार प्रस्तुति से जुड़े अहम पहलू सीखने को मिले. वर्तमान में मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं, जहां मेरी विशेष रुचि राजनीति, विदेश और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी खबरों में है. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता महज एक नौकरी नहीं बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है.

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