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Ratan Tata: रतन टाटा का जाना भारतीय उद्योग जगत के एक सुनहरे अध्याय का अंत नहीं, बल्कि उस सोच का विस्तार है जिसने आम नागरिक की जिंदगी संवारने को ही अपना सबसे बड़ा लक्ष्य माना. जानिए कैसे उन्होंने बिजनेस को देश सेवा से जोड़ा.

Jayaprakash Narayan Death Anniversary: संपूर्ण क्रांति के नायक जेपी की आज पुण्यतिथि है. 1978 में जब वे अंतिम बार अपने गांव सिताब दियारा आए थे, तो विदाई के वक्त पूरा गांव और खुद जेपी भावुक हो उठे थे.

दक्षिण एशिया में बढ़ती गर्मी के बीच भारत, नेपाल, बांग्लादेश और भूटान ने हीटवेव और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है.

हेमचन्द्र विक्रमादित्य, जिन्हें इतिहास में हेमू के नाम से भी जाना जाता है, 16वीं सदी के उन वीर योद्धाओं में शामिल हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा, सैन्य कौशल और दृढ़ संकल्प के दम पर दिल्ली की सत्ता तक पहुंच बनाई.

Meghnad Saha: मेघनाद साहा को सबसे बड़े खगोल विज्ञानी के रूप में जाना जाता है. उन्होंने ऐसा उपकरण बनाया जो सोलर किरणों के दबाव और वजन को माप सकता था. अपनी प्रसिद्ध साहा इक्वेशन के जरिए उन्होंने तारों के ताप और वर्णक्रम के निकट संबंध के भौतिकीय कारणों को खोज निकाला.

रामनाथ गोयनका भारतीय पत्रकारिता के उन चुनिंदा नामों में हैं, जिन्होंने प्रेस की आजादी को सिर्फ विचार नहीं, बल्कि अपने काम का हिस्सा बनाया.

भारत के लोकतंत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद हमेशा से विशेष महत्व रखता रहा है. यह पद ना सिर्फ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी वहन करता है, बल्कि समय-समय पर राजनीतिक दबावों के बीच अपनी विश्वसनीयता साबित करने की भी परीक्षा देता है.

Fundamental Duties: भारतीय संविधान निर्माताओं ने अधिकारों को प्राथमिकता दी, जबकि महात्मा गांधी का मानना था कि अधिकार केवल कर्तव्यों के सच्चे पालन से उत्पन्न होते हैं. जानिए संविधान निर्माण और गांधीवादी विचारों के बीच के संतुलन व संघर्ष की पूरी कहानी.

1 अक्टूबर 1926 को स्थापित UPSC ने 1 अक्टूबर 2026 को अपना शताब्दी वर्ष पूरा किया. जानिए ईस्ट इंडिया कंपनी के दौर से लेकर धौलपुर हाउस और संवैधानिक निकाय बनने तक की पूरी यात्रा.

प्रत्येक वर्ष 30 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस मनाया जाता है. यह दिवस संत जेरोम की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्हें अनुवादकों का संरक्षक संत माना जाता है. संत जेरोम ने चौथी-पाँचवीं शताब्दी में बाइबल का लैटिन में अनुवाद किया था, जिसे ‘वulgेट’ के नाम से जाना जाता है.