बदलती हुई दुनिया और आधुनिक युद्ध की रणनीतियों के बीच भारत अपनी रक्षा तैयारियों को एक बिल्कुल नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में है. अब देश की सुरक्षा केवल जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि अंतरिक्ष (स्पेस) भी हमारी रक्षा ताकत का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. दुश्मन की हरकतों पर पैनी नजर रखने और हमारे फाइटर जेट्स के बीच सुरक्षित तालमेल बिठाने के लिए भारत ने अंतरिक्ष आधारित सैन्य संचार को और मजबूत करने का ऐतिहासिक फैसला किया है.
रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के साथ 2,563 करोड़ रुपये का एक बड़ा करार किया है. इसके तहत ‘GSAT-7C’ नाम का एक अत्याधुनिक सैन्य संचार उपग्रह तैयार किया जाएगा. अंतरिक्ष में स्थापित होने के बाद यह सैटेलाइट एक मजबूत कम्यूनिकेशन हब की तरह काम करेगा.
इसकी सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि जब हमारे लड़ाकू विमान, सर्विलांस एयरक्राफ्ट या ड्रोन रेडियो संपर्क की सामान्य सीमा से बहुत दूर भी होंगे, तब भी वे इस उपग्रह के जरिए जमीन पर बैठे कमांड सेंटर से सुरक्षित तरीके से जुड़े रहेंगे. इससे डेटा और जरूरी जानकारी का आदान-प्रदान बेहद सुरक्षित और तेज हो जाएगा. बता दें कि इससे पहले वायुसेना के पास दिसंबर 2018 में लॉन्च किया गया GSAT-7A उपग्रह पहले से ही मौजूद है, और अब नए सैटेलाइट के आने से हमारी अंतरिक्ष ताकत और ज्यादा अभेद्य हो जाएगी.
अंतरिक्ष के अलावा युद्ध के मैदान में बदलते ट्रेंड को देखते हुए भारतीय सेना अब ‘ड्रोन वॉरफेयर’ पर भी पूरा फोकस कर रही है. आज के समय में कम ऊंचाई पर उड़ने वाले छोटे ड्रोन और मानवरहित विमान किसी भी देश के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं. इनसे निपटने के लिए सेना ने ‘लो-एल्टीट्यूड एरियल थ्रेट रिस्पॉन्स’ सिस्टम खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके अलावा लंबी दूरी तक नजर रखने वाले सर्विलांस ड्रोन, एफपीवी ड्रोन और सैनिकों को आधुनिक ट्रेनिंग देने का काम भी तेजी से चल रहा है.
साफ है कि भारत पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ अब पूरी तरह फ्यूचर-रेडी हो रहा है. अंतरिक्ष में मजबूत संचार व्यवस्था और आसमान में ड्रोन तकनीक की यह ताकत आने वाले समय में देश की रक्षा प्रणाली को और ज्यादा अजेय बना देगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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