भारत-अमेरिका संबंधों में खटास
India US Relations: कभी ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे भव्य कार्यक्रमों ने भारत-अमेरिका संबंधों की मिसाल पेश की थी. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में हुई कुछ घटनाएं जिसने भारत-अमेरिका संबंधों में खटास पैदा कर दी. यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के बीच अब रिश्तों में खटास आ गई है. कुछ एक बार तो ऐसा भी हुआ की ट्रंप के घमंड को पीएम मोदी (PM Modi) ने एक बार में ही उतार दिया. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ऐसा क्या हुआ, जिससे भारत से रिश्तों में तल्खी आई? आइए जानते हैं कि ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच रिश्ते क्यों और कैसे खराब हुए?
संभव है कि भारत पर टैरिफ लगाने पर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump Tariff) को अमेरिका का फायदा नजर आता हो लेकिन कुछ समय से साफ दिख रहा कि इससे संबंध बिगड़ रहे हैं. दोनों देशों के व्यापार पर भी असर हो रहा है. आइए उन 7 वजहों के बारे में जानते हैं जिनके कारण भारत-अमेरिका संबंधों में खटास आई है.
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न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, 17 जून को G7 समिट से लौटते समय ट्रंप ने PM मोदी से 35 मिनट फोन पर बातचीत की. इस दौरान ट्रंप ने फिर दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का श्रेय उन्हीं को जाता है. हालांकि मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच हुए सीजफायर से अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है. इसके बावजूद भी ट्रंप नहीं माने और वे अब तक 40 से ज्यादा बार ये दावा दोहरा चुके हैं.
ट्रंप (Donald Trump) ने इसी फोन कॉल के दौरान मोदी (PM Modi) से जिक्र किया कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने वाला है. ट्रंप ने इशारा किया कि भारत को भी ऐसा करना चाहिए. हालांकि भारत ने ऐसा नहीं किया और ट्रंप नाराज हो गए. इजराइल, कंबोडिया के अलावा अजरबैजान और आर्मेनिया भी ट्रंप को नोबेल के लिए नॉमिनेट कर चुके हैं.
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कनाडा में 16 से 17 जून तक G7 समिट हुई. ट्रंप पहले दिन ही समिट में शामिल हुए और जल्दी निकल गए थे. मोदी और ट्रंप के बीच यहां बात होने वाली थी, लेकिन नहीं हो पाई. इसके बाद दोनों ने फोन पर बात की. ट्रंप ने मोदी से कहा कि वे अमेरिका होते हुए भारत जाएं, लेकिन मोदी ने इनकार कर दिया. उसी समय पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर वॉशिंगटन में थे.
इसी फोन कॉल में मोदी ने यह भी कहा कि भारत कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता कभी स्वीकार नहीं करेगा. इसकी जानकारी विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दी. मिस्री ने कहा कि ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की थी. दरअसल, भारत-पाक सीजफायर के बाद भी ट्रंप ने कहा था कि मैं दोनों देशों के साथ मिलकर यह देखने की कोशिश करूंगा कि क्या कश्मीर मसले का हल निकाला जा सकता है.
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इस कॉल के बाद तल्खियां बढ़ी और ट्रंप ने भारत के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया. उन्होंने भारत को डेड इकोनॉमी कहा और भारतीय व्यापार नीतियों को घटिया बताया. इसके बाद ट्रंप ने भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जून की इस बातचीत के बाद से दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है.
अमेरिका लंबे समय से भारत पर अपने फार्मिंग और डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए मार्केट ओपन करने का दबाव बना रहा है. भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कम टैरिफ की अमेरिकी मांग को खारिज कर दिया. ज्यादा कीमत के बावजूद घरेलू किसानों के हितों को प्राथमिकता दी. जर्मन न्यूज पेपर FAZ के दावे के मुताबिक, भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के लिए होने वाली बातचीत कैंसिल कर दी और अमेरिकी डेलिगेशन दिल्ली आने से रोक दिया गया.
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अमेरिका ने भारत पर 27 अगस्त से 50% टैरिफ लगा दिया. इसमें शामिल 25% टैरिफ पेनल्टी के तौर पर लगाई क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा है. अमेरिका का कहना है कि इससे रूस को जंग में मदद मिल रही है.
भारत ने ट्रंप की मनमानी और अहंकार को स्वीकार नहीं किया, और यही रिश्तों में खटास का सबसे बड़ा कारण बना. चाहे वह कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता हो, रूसी तेल का आयात हो, या अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ न हटाना हो, भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा. डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दबाव के बाद भी पीएम मोदी (PM Modi) की नाति दिखाती है कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत किसी के दबाव में नहीं आएगा.
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