भारतीय नौसेना को मिलेंगे ब्रह्मोस से लैस 8 नए युद्धपोत
Indian Navy: दुनिया के समुद्री नक्शे पर भारत अपनी सैन्य ताकत और रणनीतिक पकड़ लगातार मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. हिंद महासागर में चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी और पाकिस्तान की समुद्री चुनौतियों के बीच भारत ने अपनी नौसेना को आधुनिक युद्धपोतों से लैस करने की तैयारी तेज कर दी है. इसी कड़ी में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 8 नए नेक्स्ट जनरेशन कार्वेट बनाने की मंजूरी दी गई है. ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों और अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीक से लैस ये युद्धपोत समुद्र में भारत की निगरानी, सुरक्षा और हमला करने की क्षमता को नई मजबूती देंगे.
सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 8 नेक्स्ट जनरेशन कार्वेट (NGC) बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है. इन आधुनिक युद्धपोतों के नौसेना में शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और मारक क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है. खास बात यह है कि इन जहाजों का निर्माण देश के ही शिपयार्ड में किया जाएगा.
इन नेक्स्ट जनरेशन कार्वेट को आधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस किया जाएगा. इनमें सतह से सतह पर हमला करने वाली सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलें, एंटी-एयरक्राफ्ट और एंटी-सबमरीन हथियार शामिल होंगे. इससे ये युद्धपोत दुश्मन के जहाजों, हवाई हमलों और पनडुब्बियों से निपटने में सक्षम होंगे.
इन जहाजों को एडवांस स्टेल्थ तकनीक के साथ तैयार किया जाएगा. इस तकनीक की मदद से दुश्मन के रडार पर इनकी पहचान करना मुश्किल होगा. यानी ये युद्धपोत समुद्र में छिपकर निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर अचानक हमला करने की क्षमता रखेंगे.
इन कार्वेट का इस्तेमाल सिर्फ तटीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा. ये निगरानी, सर्फेस एक्शन ग्रुप ऑपरेशन, सर्च एंड अटैक मिशन और समुद्री जहाजों को सुरक्षा देने जैसे कई महत्वपूर्ण अभियानों में हिस्सा लेंगे.
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में इनकी तैनाती से भारत की समुद्री निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी. हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी के बीच ये युद्धपोत भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूती दे सकते हैं. वहीं, पाकिस्तान की ओर से किसी भी समुद्री चुनौती का जवाब देने में भी इनकी भूमिका अहम हो सकती है.
इस परियोजना की एक बड़ी खासियत यह है कि सभी आठों युद्धपोतों का निर्माण भारतीय शिपयार्ड में किया जाएगा. इससे देश के रक्षा उद्योग और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, भारतीय नौसेना को अपनी जरूरतों के मुताबिक आधुनिक युद्धपोत मिल सकेंगे.
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यह परियोजना भारत के आत्मनिर्भर भारत और SAGAR यानी ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास’ के विजन के अनुरूप है. इन युद्धपोतों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की तटीय रक्षा के साथ-साथ गहरे समुद्र में लंबे समय तक अभियान चलाने की क्षमता भी मजबूत होगी.
-भारत एक्सप्रेस
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