खाकी वर्दी, हाथ में डंडा और चेहरे पर अनुशासन की सख्ती…आमतौर पर पुलिस की यही छवि हमारे जेहन में आती है. लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में शनिवार, 4 अप्रैल को एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पुलिस के मानवीय चेहरे को नई परिभाषा दे दी. दरअसल राजस्थान विश्वविद्यालय के पास ड्यूटी पर तैनात महिला इंस्पेक्टर गुंजन सोनी का जन्मदिन किसी आलीशान होटल में नहीं, बल्कि सड़क किनारे खड़ी पुलिस वैन के बोनट पर मनाया गया. इस सादे समारोह की सबसे खास बात यह थी कि केक काटने वाले उनके परिवार के सदस्य नहीं बल्कि वो दंपती था जिसका घर कभी टूटने की कगार पर था.
इस भावुक जश्न की नींव साल भर पहले अलवर में पड़ी थी. अपनी पोस्टिंग के दौरान इंस्पेक्टर गुंजन सोनी के पास एक ऐसा मामला आया था, जहां पति-पत्नी के बीच गलतफहमियां इस कदर बढ़ चुकी थीं कि रिश्ता खत्म होने वाला था. कानून की पेचीदगियों में उलझने के बजाय गुंजन ने एक बड़े भाई या बहन की तरह धैर्य और संवेदनशीलता से दोनों पक्षों को सुना.
उनकी एक छोटी सी समझाइश और रिश्तों को संभालने के हुनर ने उस बिखरती गृहस्थी को बचा लिया. आज वह दंपती न केवल साथ है, बल्कि अपनी खुशहाल जिंदगी का पूरा श्रेय इंस्पेक्टर गुंजन की उसी एक ‘कौंसिलिंग’ को देता है.
कृतज्ञता का आलम यह है कि वह दंपती पिछले कई सालों से बिना चूके इंस्पेक्टर गुंजन सोनी का जन्मदिन मनाने पहुंचता है. शनिवार को भी जब गुंजन जयपुर की सड़कों पर अपनी ड्यूटी निभा रही थीं, तो यह जोड़ा छोटा सा केक लेकर वहीं पहुंच गया.
सड़क के किनारे पुलिस की गाड़ी के बोनट पर केक रखा गया और ड्यूटी के बीच ही चंद मिनटों के लिए खुशियों का यह कारवां रुक गया. वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मी और राहगीर भी इस ‘अनोखे’ जन्मदिन को देखकर अपनी मुस्कान रोक नहीं पाए.
अक्सर माना जाता है कि पुलिस की जिंदगी फाइलों और अपराधियों के बीच भावनाओं से दूर हो जाती है, लेकिन इंस्पेक्टर गुंजन सोनी ने साबित कर दिया कि वर्दी के पीछे भी एक संवेदनशील दिल धड़कता है. यह दृश्य केवल एक सेलिब्रेशन नहीं था बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक संदेश था जो पुलिस को केवल दंड देने वाली संस्था समझते हैं. गुंजन ने दिखाया कि पुलिस का काम केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि समाज के टूटे हुए रिश्तों में उम्मीद की रोशनी जलाना भी है.
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सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद लोग इसे इंस्पेक्टर गुंजन की ‘असली कमाई’ बता रहे हैं. सरकारी महकमों में प्रमोशन और मेडल तो मिलते ही रहते हैं, लेकिन किसी अनजान परिवार का इस तरह हर साल लौटकर आना और प्यार बरसाना, किसी भी अधिकारी के लिए सबसे बड़ा सम्मान है. यह कहानी हमें याद दिलाती है कि जब इंसानियत और कर्तव्य का संगम होता है, तो वह केवल फाइलों में बंद नहीं रहता, बल्कि लोगों के दिलों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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