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झारखंड के गांवों पर मंडराया खतरा, 700 करोड़ रुपये अटकने से सियासी घमासान

Jharkhand News: रांची/मधुकर आनंद: झारखंड में गांवों की तस्वीर बदलने और वहां बुनियादी सुविधाएं जुटाने के लिए आने वाली बड़ी रकम पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं. राज्य की पंचायतों को 15वें वित्त आयोग से मिलने वाली अंतिम किस्त की करीब 700 करोड़ रुपये की राशि अब नहीं मिल सकेगी.

इसके पीछे मुख्य वजह पहले जारी की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) समय पर जमा न होना बताई जा रही है. कागजी प्रक्रिया की इस चूक का खामियाजा सीधा ग्रामीण इलाकों में होने वाले विकास कार्यों को भुगतना पड़ सकता है.

नालियों, सड़कों और बुनियादी सुविधाओं पर असर

झारखंड की पंचायतों में इस राशि से सड़कों, नालियों और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचों का निर्माण होना था. लेकिन समय पर यूसी (Utilization Certificate) उपलब्ध न करा पाने के कारण प्रशासनिक विफलता पर सवाल खड़े हो गए हैं. जानकारों का मानना है कि यह केवल कागजी चूक नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर गांवों के विकास पर पड़ रहा है. मामला सामने आते ही राज्य में राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है.

बीजेपी और जेएमएम आमने-सामने (JMM vs BJP Jharkhand political)

इस मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया है. बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बड़ा हमला बोला है. वहीं, सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए केंद्र सरकार पर सीधा भेदभाव करने का आरोप लगाया है.

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जेएमएम के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज कुमार पांडे ने सवाल उठाया है कि क्या बीजेपी शासित अन्य राज्यों ने समय पर सभी प्रमाण पत्र जमा कर दिए हैं? पार्टी का यह भी आरोप है कि राज्य में आदिवासी नेतृत्व की सरकार होने के कारण केंद्र का रवैया हमेशा से अलग और भेदभावपूर्ण रहा है.

फंड का रुकना चिंता का विषय

प्रशासनिक लापरवाही और कागजी औपचारिकताओं में देरी के कारण विकास कार्यों के लिए मिलने वाले फंड का रुकना चिंता का विषय है. एक तरफ जहां अधिकारी इसे प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह मामला पूरी तरह केंद्र बनाम राज्य की सियासत में उलझकर रह गया है. भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए सरकार को समय पर प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने की सख्त जरूरत है, ताकि ग्रामीण विकास की रफ्तार पर ब्रेक न लगे.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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