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राज्यसभा की ‘महा-जंग’: झारखंड में आंध्र प्रदेश की एंट्री, आंकड़ों में उलझा चुनाव; समझें BJP-JMM-Congress की माथापच्ची

Jharkhand Rajya Sabha election: रांची/मधुकर आनंद: झारखंड की सियासत में राज्यसभा चुनाव का रोमांच किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लग रहा है. दो सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में अब तक 6 नामांकन पत्र बिक चुके हैं, और हर नए पर्चे के साथ राज्य का सियासी तापमान बढ़ता जा रहा है. जहां झामुमो (JMM) ने अपने ‘मास्टरस्ट्रोक’ से कांग्रेस को गच्चा दे दिया है, वहीं दो बार निर्दलीय सांसद रह चुके परिमल नाथवानी और आंध्र प्रदेश से वाईएसआरसीपी (YSRCP) के पूर्व सांसद वी. विजयसाईं रेड्डी की ‘सरप्राइज एंट्री’ ने चुनाव को पूरी तरह से उलझा दिया है.

हेमंत सोरेन का मास्टरस्ट्रोक

शुरुआती दौर में झामुमो (JMM) ने संकेत दिए थे कि वह दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने सिर्फ एक सीट पर अपने केंद्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री बैजनाथ राम को टिकट देकर सबको चौंका दिया.

हेमंत सोरेन ने इसके जरिए एक तीर से कई निशाने साधे हैं. पहला, चंपई सोरेन के मंत्रिमंडल से बैजनाथ राम का नाम कटने से बनी ‘दलित विरोधी’ छवि को धोया है. दूसरा, पलामू प्रमंडल (जहां 9 में से 4 सीटें SC के लिए रिज़र्व हैं) में अपना वर्चस्व कायम करने की मजबूत बिसात बिछाई है. वहीं, कांग्रेस ने प्रणव झा को उतारा है, लेकिन पार्टी की सबसे बड़ी चिंता यही है कि उसके कई आदिवासी विधायक हेमंत सोरेन के प्रति नरम रुख रखते हैं, ऐसे में कांग्रेस ‘इंटैक्ट’ (एकजुट) रह पाएगी या नहीं, यह बड़ा सवाल है.

परिमल नाथवानी की ‘सुपर-एंट्री’ (Rajya Sabha candidate Jharkhand)

इस चुनाव का सबसे बड़ा ट्विस्ट शनिवार को तब आया, जब उद्योगपति परिमल नाथवानी ने अचानक पर्चा खरीदा और विशेष विमान से रांची पहुंचकर सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की. एक तरफ भाजपा ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और गौरव वल्लभ के चेहरे पर निराशा साफ दिखी. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा नाथवानी पर दांव लगा सकती है (जैसा 2014 में हुआ था). नाथवानी के हेमंत सोरेन से अच्छे संबंध हैं. जानकार मानते हैं कि अगर नाथवानी जाते हैं, तो हेमंत भविष्य की राजनीति के लिहाज से खुद को ‘कंफर्टेबल जोन’ में महसूस करेंगे.

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वी. विजयसाईं रेड्डी: आंध्र से रांची क्यों पहुंचे?

एक और चौंकाने वाला नाम वाईएसआरसीपी (YSRCP) के पूर्व राज्यसभा सांसद वी. विजयसाईं रेड्डी का है. चार्टर्ड अकाउंटेंट और शराब घोटाले-मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दायरे में रहे रेड्डी ने भी पर्चा खरीदा है. हालांकि, किसी भी प्रत्याशी को नामांकन के लिए 9 विधायकों का समर्थन चाहिए, ऐसे में रेड्डी किसके ‘आश्वासन’ पर झारखंड के अखाड़े में कूदे हैं, यह रहस्य अब भी बरकरार है.

क्या है 28 वोटों का जादुई गणित? (Jharkhand Rajya Sabha Election Number)

झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में जीत के लिए एक प्रत्याशी को प्रथम वरीयता के 28 वोटों की जरूरत है. इंडिया गठबंधन में JMM (34), कांग्रेस (16), RJD (4), माले (2) यानी कुल 56 विधायक हैं. वहीं BJP (21), और अन्य (लोजपा, जदयू, आजसू, JLKM के 1-1) = कुल 25 विधायक.

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JMM के पास अपनी सीट निकालने के बाद 6 अतिरिक्त वोट हैं, लेकिन कांग्रेस को 16 से 28 तक पहुंचने के लिए JMM और निर्दलीयों की दरकार होगी. वहीं भाजपा को भी 7 और वोट चाहिए. सोमवार को नामांकन के दिन असली तस्वीर साफ होगी, लेकिन एक बात तय है कि इस बार झारखंड का राज्यसभा चुनाव सीधे ‘सुलझने’ के बजाय बुरी तरह ‘उलझ’ गया है. क्या पार्टी वाले राज्यसभा पहुंचेंगे या 2014 की तरह फिर कोई ‘निर्दलीय’ बाजी मार ले जाएगा? नजरें टिकी रहेंगी.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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