Bharat Express DD Free Dish

राज्यसभा की ‘महा-जंग’: झारखंड में आंध्र प्रदेश की एंट्री, आंकड़ों में उलझा चुनाव; समझें BJP-JMM-Congress की माथापच्ची

Jharkhand Rajya Sabha election: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए 6 नामांकन पत्र बिक चुके हैं. JMM ने बैजनाथ राम को टिकट दिया है, जबकि परिमल नाथवानी और आंध्र प्रदेश से वी. विजयसाईं रेड्डी ने पर्चा खरीद कर रोमांच बढ़ा दिया है. जानिए 28 वोटों के जादुई आंकड़े का पूरा गणित

Jharkhand Rajya Sabha election JMM BJP Congress

Jharkhand Rajya Sabha election: रांची/मधुकर आनंद: झारखंड की सियासत में राज्यसभा चुनाव का रोमांच किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लग रहा है. दो सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में अब तक 6 नामांकन पत्र बिक चुके हैं, और हर नए पर्चे के साथ राज्य का सियासी तापमान बढ़ता जा रहा है. जहां झामुमो (JMM) ने अपने ‘मास्टरस्ट्रोक’ से कांग्रेस को गच्चा दे दिया है, वहीं दो बार निर्दलीय सांसद रह चुके परिमल नाथवानी और आंध्र प्रदेश से वाईएसआरसीपी (YSRCP) के पूर्व सांसद वी. विजयसाईं रेड्डी की ‘सरप्राइज एंट्री’ ने चुनाव को पूरी तरह से उलझा दिया है.

हेमंत सोरेन का मास्टरस्ट्रोक

शुरुआती दौर में झामुमो (JMM) ने संकेत दिए थे कि वह दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने सिर्फ एक सीट पर अपने केंद्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री बैजनाथ राम को टिकट देकर सबको चौंका दिया.

हेमंत सोरेन ने इसके जरिए एक तीर से कई निशाने साधे हैं. पहला, चंपई सोरेन के मंत्रिमंडल से बैजनाथ राम का नाम कटने से बनी ‘दलित विरोधी’ छवि को धोया है. दूसरा, पलामू प्रमंडल (जहां 9 में से 4 सीटें SC के लिए रिज़र्व हैं) में अपना वर्चस्व कायम करने की मजबूत बिसात बिछाई है. वहीं, कांग्रेस ने प्रणव झा को उतारा है, लेकिन पार्टी की सबसे बड़ी चिंता यही है कि उसके कई आदिवासी विधायक हेमंत सोरेन के प्रति नरम रुख रखते हैं, ऐसे में कांग्रेस ‘इंटैक्ट’ (एकजुट) रह पाएगी या नहीं, यह बड़ा सवाल है.

परिमल नाथवानी की ‘सुपर-एंट्री’ (Rajya Sabha candidate Jharkhand)

इस चुनाव का सबसे बड़ा ट्विस्ट शनिवार को तब आया, जब उद्योगपति परिमल नाथवानी ने अचानक पर्चा खरीदा और विशेष विमान से रांची पहुंचकर सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की. एक तरफ भाजपा ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और गौरव वल्लभ के चेहरे पर निराशा साफ दिखी. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा नाथवानी पर दांव लगा सकती है (जैसा 2014 में हुआ था). नाथवानी के हेमंत सोरेन से अच्छे संबंध हैं. जानकार मानते हैं कि अगर नाथवानी जाते हैं, तो हेमंत भविष्य की राजनीति के लिहाज से खुद को ‘कंफर्टेबल जोन’ में महसूस करेंगे.

ये भी पढ़ें: हराम..गुनाह..बेदखल: महिला MLA ने जलाया दीप तो ‘सुलगे’ मौलाना, केरलम में सियासी बवाल

वी. विजयसाईं रेड्डी: आंध्र से रांची क्यों पहुंचे?

एक और चौंकाने वाला नाम वाईएसआरसीपी (YSRCP) के पूर्व राज्यसभा सांसद वी. विजयसाईं रेड्डी का है. चार्टर्ड अकाउंटेंट और शराब घोटाले-मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दायरे में रहे रेड्डी ने भी पर्चा खरीदा है. हालांकि, किसी भी प्रत्याशी को नामांकन के लिए 9 विधायकों का समर्थन चाहिए, ऐसे में रेड्डी किसके ‘आश्वासन’ पर झारखंड के अखाड़े में कूदे हैं, यह रहस्य अब भी बरकरार है.

क्या है 28 वोटों का जादुई गणित? (Jharkhand Rajya Sabha Election Number)

झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में जीत के लिए एक प्रत्याशी को प्रथम वरीयता के 28 वोटों की जरूरत है. इंडिया गठबंधन में JMM (34), कांग्रेस (16), RJD (4), माले (2) यानी कुल 56 विधायक हैं. वहीं BJP (21), और अन्य (लोजपा, जदयू, आजसू, JLKM के 1-1) = कुल 25 विधायक.

ये भी पढ़ें: कौन हैं डोनाल्ड ट्रंप को दच्चा देने वाले AI एक्सपर्ट श्रीराम कृष्णन? चेन्नई से निकले और हिलाया व्हाइट हाउस

JMM के पास अपनी सीट निकालने के बाद 6 अतिरिक्त वोट हैं, लेकिन कांग्रेस को 16 से 28 तक पहुंचने के लिए JMM और निर्दलीयों की दरकार होगी. वहीं भाजपा को भी 7 और वोट चाहिए. सोमवार को नामांकन के दिन असली तस्वीर साफ होगी, लेकिन एक बात तय है कि इस बार झारखंड का राज्यसभा चुनाव सीधे ‘सुलझने’ के बजाय बुरी तरह ‘उलझ’ गया है. क्या पार्टी वाले राज्यसभा पहुंचेंगे या 2014 की तरह फिर कोई ‘निर्दलीय’ बाजी मार ले जाएगा? नजरें टिकी रहेंगी.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read