Karnataka BJP Crisis 2026: भारतीय राजनीति में इन दिनों ‘क्रॉस वोटिंग’ का दौर चल पड़ा है. हाल ही में झारखंड के राज्यसभा चुनाव में बहुमत न होने के बावजूद एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी की जादुई जीत हुई. कूटनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या कांग्रेस अब झारखंड की उस करारी शिकस्त का बदला सुदूर दक्षिण के राज्य कर्नाटक में ले रही है. कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनाव के जो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं, उसने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की रातों की नींद उड़ा दी है.
इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद दिल्ली दरबार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कड़ा रुख अपनाया है. कर्नाटक में पार्टी के भीतर हुई गद्दारी और क्रॉस वोटिंग से बेहद नाराज नितिन नबीन (Nitin Nabin BJP President) ने फौरन दिल्ली में एक आपात बैठक बुलाई है. उन्होंने कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विपक्ष के नेता आर. अशोक समेत कई शीर्ष नेताओं को दिल्ली तलब किया है.
कर्नाटक विधान परिषद की 7 सीटों पर हुए इस चुनाव में कांग्रेस ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए 5 सीटों पर कब्जा जमा लिया, जबकि भाजपा को सिर्फ 2 सीटें मिलीं और उसकी सहयोगी जेडी(एस) अपना खाता भी नहीं खोल सकी. इस चुनाव के अंकगणित ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल कांग्रेस के पास अपने दम पर सिर्फ 140 वोट थे, लेकिन नतीजों में उसे 151 वोट मिले. यानी विपक्षी खेमे के पूरे 11 अतिरिक्त वोट कांग्रेस के पाले में चले गए.
इस महा-घमासान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता डी.वी. सदानंद गौड़ा ने एक बड़ा विस्फोट करते हुए दावा किया कि उन्होंने चुनाव से पहले ही नेतृत्व को संभावित खतरे के बारे में आगाह किया था. गौड़ा के मुताबिक, 13 जून की शाम को शहर के एक लग्जरी टावर में कुछ भाजपा नेताओं और बाहरी लोगों की एक गुप्त बैठक हुई थी, जिसमें इस क्रॉस वोटिंग की पूरी स्क्रिप्ट लिखी गई थी.
सदानंद गौड़ा ने बताया कि उन्होंने उस वक्त भाजपा के एक राज्य महासचिव को फोन कर सचेत रहने को कहा था क्योंकि यह चुनाव कांग्रेस के दिग्गज नेता डी.के. शिवकुमार के लिए प्रतिष्ठा का सवाल था और वे अपनी जीत के लिए किसी भी हद तक जा सकते थे. गौड़ा ने आरोप लगाया कि जिन जनप्रतिनिधियों ने पैसों के लालच में आकर पार्टी से गद्दारी की है, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ तुरंत दलबदल कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.
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इस बीच, प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र ने विधायकों को पाक-साफ साबित करने के लिए प्रसिद्ध ‘धर्मस्थल’ मंदिर में भगवान मंजूनाथ के सामने कसम खिलाने का सुझाव दिया, लेकिन गौड़ा ने राजनीति के लिए पवित्र धार्मिक स्थलों के इस्तेमाल का कड़ा विरोध किया है. अब नितिन नबीन की इस आपात बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं कि कर्नाटक में इस भीतरघात के पीछे के ‘विभीषणों’ पर क्या एक्शन लिया जाता है.
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