केरल के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर
Kerala news: केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने पद संभालते ही ऐसा फैसला लिया है, जिस पर राज्य की राजनीति गरमा गई है. राजभवन की रसोई में मांसाहारी भोजन बनाने पर रोक लगाने के आदेश ने कांग्रेस से लेकर सीपीएम तक को नाराज कर दिया है. दोनों दलों ने इसे केरल की खानपान संस्कृति में दखल बताते हुए राज्यपाल पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और संघ परिवार का एजेंडा लागू करने का आरोप लगाया है. माथुर ने केरल के 29वें राज्यपाल के तौर पर शपथ ली है.
विवाद की शुरुआत राज्यपाल के उस निर्देश से हुई, जिसमें राजभवन की रसोई में मांसाहारी भोजन नहीं बनाने और नहीं परोसने की बात कही गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओम प्रकाश माथुर शुद्ध शाकाहारी हैं और इसी वजह से उन्होंने अपनी रसोई में यह व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया.
हालांकि, लोक भवन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस आदेश का मतलब कर्मचारियों के खानपान पर रोक लगाना नहीं है. वहां काम करने वाले कर्मचारी चाहें तो अपने घर से मांसाहारी भोजन ला सकते हैं और उसे अलग जगह बैठकर खा सकते हैं. यानी प्रतिबंध मुख्य रूप से उस रसोई पर लागू है, जहां राज्यपाल का खाना तैयार किया जाएगा.
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा कि केरल की अपनी अलग खानपान परंपरा है और यहां मछली समेत कई तरह के मांसाहारी व्यंजन लोगों के भोजन का अहम हिस्सा हैं. ऐसे में खाने की पसंद को लेकर किसी तरह का प्रतिबंध स्वीकार नहीं किया जा सकता.
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह कदम केरल की संस्कृति पर हमला करने जैसा है. उन्होंने इसे भगवाकरण की शुरुआत बताते हुए कहा कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से लोगों की परंपराओं का सम्मान करने की उम्मीद की जाती है.
कांग्रेस के साथ-साथ सीपीएम ने भी इस फैसले का विरोध किया है. पार्टी के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने कहा कि भारत में लोगों को लोकतांत्रिक अधिकार मिले हुए हैं, लेकिन अब भोजन को भी सांप्रदायिक मुद्दा बनाने की कोशिश हो रही है.
ये भी पढ़ें: ‘सत्य निकेतन जैसे हादसे से बाल-बाल बची दिल्ली…!’ पांडव नगर में झुकीं दो इमारतें, MCD का तुरंत एक्शन
राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी खाने की पसंद को व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताया. उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को क्या खाना चाहिए, इस पर फैसला थोपना संविधान की भावना के खिलाफ है.
फिलहाल, राज्यपाल के आदेश को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. हालांकि, कर्मचारियों के खाने पर प्रतिबंध नहीं होने की सफाई के बावजूद यह मुद्दा केरल में खानपान की आजादी, सांस्कृतिक पहचान और राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ चुका है.
-भारत एक्सप्रेस
DA Hike Update: लगातार दो कैबिनेट बैठकों में फैसला न होने से केंद्रीय कर्मचारियों का…
तीस हजारी कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में गिरफ्तार बानीत…
पारसी समुदाय के प्रमुख संगठनों ने टाटा ट्रस्ट्स के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को…
Delhi School Incident: दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित सर्वोदय बाल एवं बालिका विद्यालय में 12वीं…
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरभ दास को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने दिल्ली निवास का…
Philippines Plane Crash: फिलीपींस के फर्नांडो एयर बेस पर ट्रेनिंग के दौरान दो SF-260 सैन्य…